सिर्फ़ FIR के आधार पर हथियार का लाइसेंस रद्द नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

Update: 2026-04-24 04:51 GMT

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फ़ैसला दिया कि हथियार का लाइसेंस सिर्फ़ FIR के आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता, जब तक कि उसमें हथियार के गलत इस्तेमाल या उसे चलाने का कोई ज़िक्र न हो।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के पिछले फ़ैसले राजीव कुमार @ मोनू शुक्ला बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (प्रधान सचिव, गृह और अन्य के ज़रिए) पर भरोसा करते हुए जस्टिस इरशाद अली ने कहा:

“यह बिल्कुल साफ़ है कि सिर्फ़ FIR के आधार पर—जहां साफ़ तौर पर हथियार का कभी इस्तेमाल नहीं हुआ और हथियार के गलत इस्तेमाल के कोई आरोप नहीं हैं—लाइसेंस रद्द नहीं किया जा सकता।”

याचिकाकर्ता को उसके हथियार का लाइसेंस रद्द करने के संबंध में 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया गया, जिसका आधार यह था कि हथियार का इस्तेमाल किसी अपराध में किया गया। याचिकाकर्ता ने जवाब दिया कि उसने नोटिस में बताए गए अपराध में अपने हथियार का इस्तेमाल नहीं किया और उसे झूठा फँसाया जा रहा है। याचिकाकर्ता का लाइसेंस कथित तौर पर मामले की खूबियों पर विचार किए बिना और उसके जवाब को नज़रअंदाज़ करते हुए रद्द कर दिया गया।

इससे दुखी होकर याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया।

राजीव कुमार @ मोनू शुक्ला बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (प्रधान सचिव, गृह और अन्य के ज़रिए) मामले में यह स्थापित करने के लिए कई केस लॉ का हवाला दिया गया था कि सिर्फ़ किसी आपराधिक मामले के लंबित होने से हथियार का लाइसेंस रद्द नहीं हो जाएगा। यह फ़ैसला दिया गया कि यह दिखाना ज़रूरी है कि ऐसे आपराधिक मामले में शामिल होना सार्वजनिक शांति और व्यवस्था के लिए हानिकारक होगा।

कोर्ट ने फ़ैसला दिया कि इस बात को साबित करने के लिए कोई सामग्री मौजूद नहीं थी कि याचिकाकर्ता द्वारा हथियार का गलत इस्तेमाल किए जाने की संभावना थी और सहायक सामग्री के अभाव में यह निष्कर्ष मनमाना है।

यह देखते हुए कि याचिकाकर्ता को दो आपराधिक मामलों में बरी किया गया, कोर्ट ने फ़ैसला दिया कि याचिकाकर्ता द्वारा 'हथियार अधिनियम' (Arms Act) का उल्लंघन किए जाने का निष्कर्ष अवैध, मनमाना और ठोस कारणों पर आधारित नहीं है।

तदनुसार, रिट याचिका स्वीकार की गई।

Case Title: Aman Ullah v. State of U.P Thru Prin Secy Home Lko and Ors

Tags:    

Similar News