सेल डीड के पंजीकरण के समय खरीदार और विक्रेता दोनों की मौजूदगी जरूरी नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में बिक्री विलेख (Sale Deed) के पंजीकरण के समय खरीदार और विक्रेता दोनों की व्यक्तिगत मौजूदगी अनिवार्य नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में लागू पंजीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 32A, केंद्रीय कानून से अलग है और इसमें दोनों पक्षों की उपस्थिति अनिवार्य नहीं की गई है।
जस्टिस संदीप जैन ने यह टिप्पणी कानपुर की एक संपत्ति से जुड़े विवाद में ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए की। मामला शिवानी हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड और संपत्ति मालिक धर्म प्रकाश नांगिया के बीच हुए बिक्री समझौते से संबंधित था।
विक्रेता की मृत्यु के बाद उनकी बेटियों ने समझौता रद्द करने की मांग की, जबकि अस्पताल ने अदालत में विशिष्ट निष्पादन (Specific Performance) का मुकदमा दायर किया। बेटियों ने तर्क दिया कि खरीदार बिक्री विलेख कराने के लिए तैयार नहीं था और उप-पंजीयक के सामने उपस्थित नहीं हुआ।
हालांकि, हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड के आधार पर पाया कि अस्पताल लगातार बिक्री विलेख कराने के लिए तैयार था, जबकि विक्रेता पक्ष ने समझौते की शर्तें पूरी नहीं कीं। अदालत ने अपील खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट का फैसला बरकरार रखा।