ड्यूटी पर जाते समय सड़क दुर्घटना में मारे गए पुलिस के सपोर्ट स्टाफ को पेंशन नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

Update: 2026-05-12 09:50 GMT

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस के 'फॉलोअर' (सपोर्ट स्टाफ) के परिवार को पेंशन देने से इनकार किया, जिसकी ड्यूटी पर जाते समय एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। कोर्ट ने कहा कि सड़क दुर्घटनाएं 'उत्तर प्रदेश पुलिस (असाधारण पेंशन) नियमावली, 1961' के नियम 3 के दायरे में नहीं आतीं; यह नियम उन विशेष परिस्थितियों को बताता है जिनमें पेंशन दी जा सकती है।

'उत्तर प्रदेश पुलिस (असाधारण पेंशन) नियमावली, 1961' का नियम 3 कहता है कि ये नियम उत्तर प्रदेश के सभी राजपत्रित/अराजपत्रित पुलिस, PAC या अग्निशमन सेवा कर्मियों पर लागू होते हैं—चाहे वे राज्यपाल के नियम बनाने के अधिकार क्षेत्र के तहत स्थायी या अस्थायी रूप से कार्यरत हों—जिनकी मृत्यु नियम में बताई गई परिस्थितियों में होती है। इन परिस्थितियों में आतंकवादियों, नक्सलियों, उग्रवादियों या हिंसक भीड़ के साथ हमले/लड़ाई में हुई मृत्यु; प्राकृतिक या मानव-जनित आपदाओं या आग लगने की घटनाओं के दौरान राहत कार्य करते समय हुई मृत्यु; कर्फ्यू वाले इलाकों में हमले के कारण हुई मृत्यु; या किसी कैदी को ले जाते समय (एस्कॉर्ट करते समय) हुई मृत्यु शामिल है।

नियम 5 में कहा गया है कि नियम 3 में न बताई गई किसी भी अन्य विशेष परिस्थिति के लिए, पेंशन का कोई भी लाभ नहीं दिया जा सकता।

मृतक राज्य सिविल पुलिस में एक 'फॉलोअर' के पद पर कार्यरत था। 1992 में खाना बनाने के लिए जाते समय एक सड़क दुर्घटना में उसकी मृत्यु हो गई थी। उसकी पत्नी ने इन नियमों के तहत पेंशन के लिए आवेदन किया, लेकिन उसे खारिज कर दिया गया। इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।

जस्टिस विकास बुधवार ने अपने फैसले में कहा:

“विशेष रूप से, 'फॉलोअर' के तौर पर खाना बनाने के लिए जाना या वहां से लौटना, और इस दौरान सड़क पर किसी दुर्घटना का शिकार हो जाना—यह ऐसी घटना या कारक नहीं है, जिसे असाधारण पेंशन देने के लिए विचार में लिया जाए। यह बात तब और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, जब नियम 5 खुद ही एक रोक लगाता है कि नियम 3 के दायरे में न आने वाले किसी भी अन्य कारण से हुई मृत्यु के मामले में कोई भी पेंशन लाभ नहीं दिया जाएगा। चूंकि नियम 3 में ऐसी किसी विशेष परिस्थिति का कोई ज़िक्र नहीं है, इसलिए इस आधार पर याचिकाकर्ता (मृतक की पत्नी) किसी भी राहत की हकदार नहीं है।”

तदनुसार, कोर्ट ने फैसला सुनाया कि याचिकाकर्ता इन नियमों के तहत किसी भी लाभ की हकदार नहीं होगी। इसी के साथ रिट याचिका निस्तारित किया गया।

Case Title: Smt. Shushila Shukla v. The State Of U.P.Through Principal Secy.

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