विज्ञापन जारी होने के साथ ही भर्ती प्रक्रिया शुरू हो जाती है, बाद में लागू कानून उस पर लागू नहीं होगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि भर्ती प्रक्रिया की शुरुआत नियुक्ति की मंजूरी से नहीं, बल्कि विज्ञापन जारी होने की तारीख से मानी जाएगी। अदालत ने कहा कि यदि भर्ती का विज्ञापन किसी नए कानून के लागू होने से पहले जारी हो चुका है, तो बाद में लागू हुआ कानून उस भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करेगा।
जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी ने सुप्रीम कोर्ट के तेज प्रकाश पाठक बनाम राजस्थान हाईकोर्ट फैसले का हवाला देते हुए कहा कि भर्ती प्रक्रिया विज्ञापन जारी होने से शुरू होकर अधिसूचित रिक्तियों को भरने तक चलती है। एक बार प्रक्रिया शुरू हो जाने के बाद बीच में नियम या कानून नहीं बदले जा सकते।
मामला बागपत के दिगंबर जैन महाविद्यालय में सहायक प्रोफेसर के 22 पदों पर भर्ती से जुड़ा था। कॉलेज ने अगस्त 2023 में विज्ञापन जारी किए थे, जबकि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम, 2023 बाद में 21 अगस्त 2023 को लागू हुआ।
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि नए कानून के लागू होने के बाद भर्ती उसी के अनुसार होनी चाहिए। हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि चूंकि भर्ती प्रक्रिया विज्ञापन जारी होने के साथ ही शुरू हो चुकी थी, इसलिए वह 2023 अधिनियम की 'रिपील एंड सेविंग्स' (Repeal and Savings) धारा के तहत संरक्षित रहेगी और पूर्ववर्ती कानून के अनुसार ही पूरी की जाएगी।
अदालत ने यह भी कहा कि भर्ती की अनुमति में नए आयोग के गठन पर प्रक्रिया बदलने संबंधी जो शर्त लगाई गई थी, उसका कोई कानूनी प्रभाव नहीं है, क्योंकि नई व्यवस्था लागू होने से पहले ही चयन प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी।
इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए राज्य सरकार के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें भर्ती प्रक्रिया को पुराने कानून के तहत जारी रखने का निर्णय लिया गया था।