'As Is Where Is' आधार पर खरीदी जमीन की जांच खरीदार की जिम्मेदारी: इलाहाबाद हाईकोर्ट

Update: 2026-08-13 11:24 GMT

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि “As Is Where Is” आधार पर नीलामी में Commercial Plot खरीदने वाले निवेशक से साइट का Physical Inspection करने की उम्मीद की जाती है। खरीदार को Transaction में प्रवेश करने से पहले संपत्ति की वास्तविक स्थिति की जांच करनी चाहिए।

जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस कुणाल रवि सिंह की पीठ ने गोरखपुर विकास प्राधिकरण के दो Commercial Plots की E-Auction से जुड़े मामले में यह टिप्पणी की।

GDA ने बुद्ध विहार पार्ट-A में दो प्लॉट नीलामी के लिए रखे थे। याचिकाकर्ता कंपनी ने करीब ₹1.02 करोड़ Registration Money जमा किया और करीब ₹34.45 करोड़ व ₹3.85 करोड़ की बोली लगाकर Highest Bidder बनी।

हालांकि, तय समय में बोली की 40% राशि जमा नहीं की गई। बाद में कंपनी ने दावा किया कि देवरिया बाईपास पर बने Flyover से प्लॉट का Entry-Exit बाधित हो गया और उसकी Commercial Value प्रभावित हुई। GDA ने Allotment रद्द कर करीब ₹1.02 करोड़ जब्त कर लिए।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में यह साबित नहीं हुआ कि कंपनी ने नीलामी से पहले साइट का Inspection किया था। Flyover नीलामी के समय मौजूद था, इसलिए एक Reasonable and Prudent Buyer साधारण Site Inspection से स्थिति देख सकता था।

कोर्ट ने यह भी पाया कि GDA ने 40% राशि जमा न करने के आधार पर Registration Money जब्त की, जबकि Auction Conditions में Forfeiture का आधार पूरी Bid Amount का समय पर भुगतान न करना था। इसलिए इस आधार पर की गई Forfeiture को कोर्ट ने अवैध माना।

हालांकि, कंपनी को रकम वापस नहीं मिली। कोर्ट ने कहा कि उसने Forfeiture Condition को चुनौती नहीं दी थी और न ही Allotment बहाल कराने या समय बढ़ाने की मांग की थी।

Section 74 पर कोर्ट ने BPL Limited v. Morgan Securities का हवाला देते हुए कहा कि Earnest Money की Forfeiture को केवल “Pre-estimate of Loss” के आधार पर Penalty नहीं माना जा सकता।

अंततः हाईकोर्ट ने Writ Petition खारिज कर दी।

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