Cow Slaughter Act | 80 किलोग्राम गोमांस ले जा रहे वाहन का मालिक अज्ञानता की दलील देकर जब्ती से नहीं बच सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि वाहन का मालिक, जो गोमांस बरामद होने के समय स्वयं उसमें यात्रा कर रहा था, उत्तर प्रदेश गोहत्या निवारण अधिनियम, 1955 के तहत यह दलील देकर जब्ती का विरोध नहीं कर सकता कि मांस उन यात्रियों का था, जिन्होंने वाहन किराए पर लिया था।
यह माना गया कि एक बार जब जब्त किए गए मांस की अधिकृत प्रयोगशाला द्वारा गोमांस होने की पुष्टि हो जाती है, तो अधिनियम की धारा 5-ए (10) के तहत उसके खिलाफ अनुमान लगाया जाता है, और यह उसके लिए है कि वह इसे ठोस साक्ष्य से हटा दे।
अधिनियम की धारा 5-ए(6) के अनुसार गोमांस से संबंधित वाहन के चालक, परिचालक और मालिक पर अपराध का आरोप लगाया जाना आवश्यक है, जब तक कि यह साबित न हो जाए कि किसी अन्य व्यक्ति ने उनकी जानकारी के बिना और सभी सावधानियों के बावजूद वाहन का उपयोग किया। धारा 5-ए(7) में अधिनियम का उल्लंघन करने पर गोमांस के परिवहन के लिए इस्तेमाल किए गए वाहन को जब्त करने का प्रावधान है।
जस्टिस संदीप जैन ने कहा,
"चूंकि याचिकाकर्ता के वाहन में 80 किलोग्राम गोमांस पाया गया, इसलिए उसके खिलाफ कानूनी धारणा है कि उसने मांस प्राप्त करने के लिए गाय का वध किया, जिसे याचिकाकर्ता इसके विपरीत ठोस सबूत पेश करके खंडन करने में सक्षम नहीं है।"
दिनांक 29.03.2025 को मुखबिर की सूचना पर याचिकाकर्ता की बजाज ऑटो को खलीलाबाद, संतकबीरनगर में रोका गया। चार बोरों में लगभग 80 किलोग्राम गोमांस बरामद किया गया। साथ ही याचिकाकर्ता और फैय्याज, जो दोनों वाहन में यात्रा कर रहे थे, के पास से एक चाकू बरामद किया गया और 1955 के अधिनियम की धारा 3/5-ए/8 और शस्त्र अधिनियम, 1959 की धारा 4/25 के तहत मामला अपराध संख्या 259/2025 के रूप में FIR दर्ज की गई।
जिला मजिस्ट्रेट, संतकबीर नगर ने आदेश दिनांक 30.6.2025 द्वारा राज्य सरकार के पक्ष में वाहन को जब्त कर लिया और याचिकाकर्ता के धारा 5-ए (8) के तहत संशोधन को आयुक्त, बस्ती मंडल द्वारा 27.4.2026 को खारिज कर दिया गया।
दोनों आदेशों को रिट में चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता ने दलील दी कि ऑटो 18.3.2025 को किराए पर यात्रियों को ले जाकर आजीविका कमाने के लिए खरीदा गया, उसने इसके लिए एक ड्राइवर नियुक्त किया था। तर्क दिया गया कि किराये पर लेने वाले तीन यात्री उसकी सहमति के बिना मांस ले जा रहे थे। यह तर्क दिया गया कि आपराधिक मनःस्थिति या मिलीभगत के अभाव में वाहन को जब्त नहीं किया जा सकता।
एजीए ने प्रस्तुत किया कि याचिकाकर्ता को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया और उसने धारा 5-ए(10) के तहत अनुमान का खंडन नहीं किया।
अदालत ने केस डायरी से पाया कि जब वाहन जब्त किया गया तो याचिकाकर्ता स्वयं उसमें यात्रा कर रहा था, और तीन किराएदारों द्वारा संयुक्त कब्जे की उसकी दलील किसी भी सबूत से समर्थित नहीं थी।
कोर्ट ने आगे कहा,
"याचिकाकर्ता यह साबित करने के लिए उन व्यक्तियों की अच्छी तरह से जांच कर सकता था कि वे कथित तौर पर उसकी जानकारी के बिना, उसके वाहन में गोमांस ले जा रहे थे, लेकिन याचिकाकर्ता ने उन व्यक्तियों की जांच नहीं की।"
यह देखते हुए कि फोरेंसिक साइंस लैब ने बरामद मांस के गोमांस होने की पुष्टि की, न्यायालय ने माना कि धारा 5-ए(10) के तहत अनुमान निराधार है और नीचे के अधिकारियों ने जब्ती का आदेश देकर कोई गलती नहीं की।
इसके साथ ही रिट याचिका खारिज कर दी गई और आदेश दिनांक 30.6.2025 और 27.4.2026 की पुष्टि की गई।
Case Title: Mohammad Jalaluddin vs. State Of U.P. And 3 Others 2026 LiveLaw (AB) 757