बिजली तक पहुंच अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिजली कनेक्शन चाहने वाली बहू की मदद की

Update: 2026-04-16 05:02 GMT

इस बात पर ज़ोर देते हुए कि बिजली कनेक्शन पाना भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत मौलिक अधिकार है, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में राज्य के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे वैवाहिक विवाद के बीच एक नई घरेलू बिजली कनेक्शन के लिए एक बहू द्वारा दायर आवेदन पर कार्रवाई करें।

जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत प्रीति शर्मा द्वारा दायर एक रिट याचिका पर यह आदेश पारित किया।

संक्षेप में मामला

याचिकाकर्ता (शर्मा) प्रतिवादी नंबर 7 की बहू है और प्रतिवादी नंबर 6 की पत्नी है। उसका पक्ष यह था कि वह रायबरेली जिले में एक साझा घर में 20 वर्षों से अधिक समय से रह रही है और उसके छोटे बच्चे हैं। हालांकि, उसके ससुराल वाले एक वैवाहिक विवाद के कारण उसे उक्त घर से अवैध तरीके से निकालने की कोशिश कर रहे हैं।

हाईकोर्ट के समक्ष यह प्रस्तुत किया गया कि उसकी बिजली की आपूर्ति काट दी गई, भले ही वह नियमित रूप से बिजली के बिलों का भुगतान करती थी। इसलिए उसने फरवरी, 2026 में बिजली विभाग के पास एक नए कनेक्शन के लिए आवेदन दायर किया।

चूंकि इस आवेदन पर कार्रवाई नहीं की गई। अंततः इसे अस्वीकार कर दिया गया। इसलिए उसे हाई कोर्ट का रुख करना पड़ा और बिजली विभाग को उसके आवेदन पर कार्रवाई करने और बिजली का मीटर लगाने का निर्देश देने की मांग की। यह तर्क दिया गया कि, चूँकि वह उक्त घर में रहती है, इसलिए वह सही तौर पर बिजली कनेक्शन की हकदार है।

अपनी याचिका में याचिकाकर्ता ने कहा कि बिजली की आपूर्ति बहाल करना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि उसके नाबालिग बच्चों की CBSE बोर्ड की परीक्षाएं चल रही हैं और बिजली की अनुपस्थिति उनके 'शिक्षा के अधिकार' पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है।

इसके अलावा, उसने निजी प्रतिवादियों को नए कनेक्शन की स्थापना में हस्तक्षेप करने या साझा घर पर उसके शांतिपूर्ण कब्जे में कोई बाधा उत्पन्न करने से रोकने के लिए भी निर्देश मांगे। मामले के तथ्यों को ध्यान में रखते हुए बेंच ने राय दी कि प्रतिवादी अधिकारियों को उसके आवेदन पर विचार करना चाहिए, क्योंकि वह उक्त परिसर में रहती है और बिजली कनेक्शन की हकदार है, जो अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत एक मौलिक अधिकार है।

Case title - Preeti Sharma vs State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Deptt. Energy Govt. Lko. And 7 Others 2026 LiveLaw (AB) 218

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