केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, महिलाओं के उत्पीड़न को लेकर व्यवसाय संगठनों को प्रभावी कदम उठाने को कहा है [शपथ पत्र पढ़ें]

Update: 2018-02-10 12:10 GMT

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सरकार ने देश के प्रमुख व्यवसाय संगठनों एसोचेम, फिक्की, सीआईआई, सीसीआई और नास्कॉम को कार्यस्थल पर महिलाओं के उत्पीड़न को रोकने के लिए सेक्सुअल हरासमेंट ऑफ़ वीमेन अट वर्कप्लेस (प्रिवेंशन, प्रोहिबिशन एंड रेड्रेसल) अधिनयम 2013 के तहत प्रभावी कदम उठाने को कहा है।

महिला एवं बाल विकास विभाग के वकील एडवोकेट माधवी दीवान ने मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ से कहा कि मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लिखा है कि वे इस अधिनियम को प्रभावी तरीके से लागू करें। उन्होंने कहा कि इस बारे में सरकार ने हलफनामा भी दाखिल किया है।

याचिकाकर्ता एनजीओ इनिशिएटिव फॉर इनक्लूजन फाउंडेशन के वकील संजय पारेख ने कहा कि विभिन्न स्तरों पर इस क़ानून को कौन लागू करेगा उस निकाय की कोई चर्चा नहीं है।  उन्होंने निजी संस्थानों में सेक्सुअल हरासमेंट की शिकायतों का मुद्दा भी उठाया।

पीठ ने वकील को दो सप्ताहों के भीतर अपने सुझाव देने को कहा है और इस मामले की अगली सुनवाई अब 12 मार्च को होगी।


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