सेमेस्टर परिक्षा के पहले मुंबई विश्वविद्यालय के एलएलएम के छात्रों को बॉम्बे हाई कोर्ट ने दिलाई राहत [आर्डर पढ़े]

Update: 2018-01-23 14:58 GMT

मुंबई विश्वविद्यालय के एलएलएम के छात्रों को जिनको अपने सेमेस्टर की परीक्षा की तैयारी के लिए ज्यादा समय नहीं मिला, उन्हें बड़ी राहत देते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि वे अपने दूसरे सेमेस्टर की परीक्षा के साथ ही पहले सेमेस्टर की परीक्षा भी दे सकते हैं।

न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति बीपी कोलाबावाला ने इस मामले में अपना आदेश सुनाया। इसके लिए दायर एक जनहित याचिका और एक अन्य याचिका दोनों की साथ सुनवाई की गई। दोनों ही में 23 जनवरी को शुरू होने वाले सेमेस्टर की परीक्षा को स्थगित किए जाने की मांग की गई थी।

मामले की पृष्ठभूमि

मुंबई विश्वविद्यालय के एलएलएम कोर्स में इस समय 660 छात्र पंजीकृत हैं। इनमें से 600 छात्रों ने पिछले वर्ष अक्टूबर और नवंबर में प्रवेश लिया जबकि 41 छात्रों को 26 दिसंबर 2017 को प्रवेश मिला और शेष 19 छात्रों का एडमिशन इस वर्ष जनवरी में हुआ।

छात्रों द्वारा दायर याचिका में कहा गया कि विश्वविद्यालय के स्नातक की परिक्षा का परिणाम देरी से आया जिसकी वजह से एलएलएम में प्रवेश लेने में विलंब हुआ।

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि यूजीसी के नियमों के अनुसार हर अकादमिक वर्ष में 180 दिनों की पढ़ाई होने का प्रावधान है। जिसका मतलब यह हुआ कि एक सेमेस्टर में औसतन 90 दिनों की पढ़ाई होनी चाहिए।

इस मामले में प्रवेश के एक महीना के अंदर ही परिक्षा का कार्यक्रम बना दिया गया। इसकी वजह से जिन छात्रों को इसी साल प्रवेश मिला है, उनको बहुत कम समय मिला परीक्षा की तैयारी के लिए।

आदेश

कोर्ट ने गौर किया कि प्रवेश पाने वाले छात्रों के बारे में अंतिम नोटिस 10 जनवरी को जारी हुआ और कहा, “10 जनवरी 2018 को प्रवेश पाने वाले छात्रों के लिए कल (23 जनवरी) से शुरू होने वाली परीक्षा के लिए तैयारी करना बिल्कुल नामुमकिन है। ऐसी ही मुश्किलें उन छात्रों को भी आएगी जिनको दिसंबर के अंत में प्रवेश मिला है।”

इस तरह पीठ ने कहा कि ऐसे छात्र जिनको अपने एलएलएम की परीक्षा के लिए कम समय मिला उनके साथ न्याय होना चाहिए।

पर कोर्ट ने परीक्षा को स्थगित करने से मना कर दिया और कहा कि बहुत से छात्रों ने इस परीक्षा के लिए तयारी की होगी और वे अपनी बात कहने के लिए आगे नहीं आए हैं। इसलिए एक समग्र आदेश जारी नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने कहा,

(i)  जो छात्र कल की परीक्षा में न बैठ पाएं उनको पहले सेमेस्टर की परिक्षा में असफल न माना जाए।

(ii) इस तरह के छात्रों को कल की परीक्षा में शामिल नहीं होते हैं, उन्हें प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा दूसरे सेमेस्टर की परीक्षा के साथ देने की अनुमति होगी और यह उनकी पहली परीक्षा मानी जाएगी।


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