बोफोर्स घोटाला : सुप्रीम कोर्ट ने उठाया सवाल, आपराधिक मामले में तीसरा पक्ष कैसे दाखिल कर सकता है अपील? [आर्डर पढ़े]

Update: 2018-01-16 14:55 GMT

बोफोर्स मामले को फिर से खोलने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट दो फरवरी को अहम सुनवाई करेगा।

मंगलवार को हुई सुनवाई में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगवाई वाली बेंच ने  याचिकाकर्ता अजय अग्रवाल को दो फरवरी तक बताने को कहा है कि क्या कोई ऐसा फैसला है जिसमें आपराधिक मामले में तीसरे पक्ष को इजाजत दी गई हो। वो भी तब जब जांच एजेंसी ने कोई अपील दाखिल ना की हो।

 मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता अजय अग्रवाल के याचिका दाखिल करने के लोकस पर सवाल उठाते हुए कहा कि आपराधिक मामले की अपील में  तीसरा पक्ष कैसे याचिका दाखिल कर सकता है ? अगर जांच एजेंसी याचिका दाखिल करती है तो समझ आता है, अगर मुख्य याचिकाकर्ता याचिका दाखिल करता है तो भी समझ आता है और याचिका पर सुनवाई के लिए कोर्ट तैयार होता।

 सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से पूछा कि क्या पिछले 12 सालों में कोई याचिका दाखिल कर दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई ?

वहीं सीबीआई की ओर से पेश ASG मनिंदर सिंह ने कहा कि सीबीआई ने 2005 में राय मांगी थी और फिर तय किया गया कि हाईकोर्ट के फैसले की अपील नहीं की जाएगी।

कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा है कि वो ऐसा कोर्ट फैसला लेकर आए जिसमें किसी क्रिमिनल अपील में तीसरा पक्ष को याचिका दाखिल करने की इजाजत दी गई हो।

दरअसल बीजेपी नेता व वकील अजय अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट में मामले की जल्द सुनवाई के लिए याचिका दाखिल की थी। साल 1986 में 1437 करोड़ रुपये के बोफोर्स तोप घोटाले में भारतीय अधिकारियों को 64 करोड़ रुपये घूस देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका दी गयी है।

याचिका में अग्रवाल ने कहा है कि सीबीआई ने इस मामले में 31 मई 2005 को दिल्ली हाई कोर्ट के दिए फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती नहीं दी। 2005 में दिल्ली हाई कोर्ट ने घोटाले में यूरोप में रहने वाले हिंदुजा भाईयों पर लगे सभी आरोपों को खारिज कर दिया था।

दिल्ली हाईकोर्ट के दिए फैसले के 90 दिनों के भीतर सीबीआई के इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती नहीं दिए जाने और मामले को रफा-दफा किए जाने के कथित आरोप के बाद अग्रवाल ने याचिका दाखिल कर फैसले को चुनौती दी है।

याचिका को लेकर बीजेपी नेता और वकील अजय अग्रवाल ने कहा है कि उन्होंने ये याचिका देशहित को ध्यान में रखकर सुप्रीम कोर्ट में लगाई है क्योंकि सीबीआई ने बोफोर्स घोटाले के मामले को उस वक्त आगे नहीं बढ़ाया जबकि कोर्ट का फैसला अवैध था। इसका कारण उस वक्त ये बताया गया था कि कानून मंत्रालय ने इसकी इजाजत सीबीआई को नहीं दी। अग्रवाल ने आरोप लगाया है कि घोटाले को लेकर जो उस वक्त आरोपियों और सीबीआई के बीच सांठ-गांठ हुई थी उसी के तहत लंदन में इटली के बिजनेसमैन ओत्तावियो क्वात्रोच्चि के बैंक अकाउंट को डीफ्रीज कर दिया गया था जो इस डील में बिचैलिया था। लेकिन मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट तक को इसकी जानकारी देना जरूरी नहीं समझा।

इसी सिलसिले में उस वक्त एडिशनल सॉलिस्टर जनरल रहे जनरल बी दत्ता ने इंग्लैंड का दौरा भी किया था। उन्होंने कहा है कि ऐसा कदम तब उठाया गया था जब तत्कालीन यूपीए सरकार और सीबीआई को पता था कि इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में भी उठाया गया है। अग्रवाल ने आरोप लगाया है कि इस घोटाले में दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी, क्वात्रोच्चि, विन चड्ढा, हिंदुआ भाई और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ शामिल होने के पक्के सबूत थे।  इसलिए सीबीआई की मदद से कांग्रेस सरकार ने 1986 से 2014 तक इस मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की थी।अग्रवाल ने सीबीआई निदेशक को इस मामले से जुड़े सारे दस्तावेज जांच ऐजेंसी को फिर उपलब्ध कराने का आग्रह किया है जो तीस हजारी कोर्ट से मिले थे। उन्होंने कहा है कि इस मामले की जांच होनी बहुत जरूरी है ताकि फिर से कोई राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर ऐसी हरकत करने की कोशिश भी ना कर सकें। उन्होंने आरोप लगाया है कि सीबीआई ने बिचौलिए क्वात्रोच्चि के बैंक अकाउंट को फिर से चालू करवा दिया।


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