सुप्रीम कोर्ट कॉलिजियम ने फैसले में किया संशोधन, हाईकोर्ट के एडिशनल जजों के फैसलों का मूल्यांकन करेंगी सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की समिति

Update: 2017-10-27 15:42 GMT

सुप्रीम कोर्ट कॉलिजम ने हाईकोर्ट में एडिशनल जजों को स्थायी जज के तौर पर नियुक्त करने के लिए अपने पुराने फैसले में संशोधन करने का फैसला लिया है। इसके तहत अब सुप्रीम कोर्ट के दो जज हाईकोर्ट के एडिशन जज के फैसलों का मूल्यांकन करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट कॉलिजियम ने अपने पुराने फैसले में आंशिक संशोधन करते हुए निर्णय लिया है कि हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से एडिशनल जजों के दिए फैसलों को मंगाया जाएगा और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के नामांकित सलाहकार जज के अलावा सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की कमेटी उनका मूल्यांकन करेगी। 26 अक्तूबर 2017 को हुई कॉलिजियम की बैठक में सर्वसम्मति से ये निर्णय लिया गया।

इससे पहले ये कहा गया था कि कॉलिजियम हाईकोर्ट के एडिशनल जजों को स्थायी जज बनाने की प्रक्रिया में उनके फैसलों का मूल्यांकन करने से दूर रहेगा।

तीन मार्च 2017 को कॉलिजियम ने सर्वसम्मति से ये फैसला लिया था कि 30 अक्तूबर 2010 को उस वक्त के चीफ जस्टिस द्वारा लिए गए फैसले में गाइडलाइन नंबर दो को हटा लिया जाए जिसके तहत जजमेंट कमेटी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से एडिशनल जजों के दिए फैसलों को मूल्यांकन के लिए मंगाए ताकि ये तय किया जा सके कि वो स्थायी जज बनने के लिए उपयुक्त हैं या नहीं।

इस निर्णय को 16 अप्रैल 2017 को केंद्रीय कानून मंत्री को भेज दिया गया था। 6 जून 2017 को कानून मंत्री ने छत्तीसगढ हाईकोर्ट में  तीन एडिशनल जजों को स्थायी जज बनाने के मामले में कुछ सुझाव दिए थे। कॉलिजियम ने इन सुझावों के तहत ही पहले के निर्णय में संशोधन किया है।


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