अवमानना मामले में वकील की सजा निलंबित [आर्डर पढ़े]

Update: 2017-10-26 11:15 GMT

अवमानना मामले में एक वकील को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जेल की सजा सुनाई थी जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने निलंबित कर दिया है। हाई कोर्ट ने आपराधिक अवमानना की कार्रवाई में वकील अशोक पांडे को जेल की सजा सुनाई थी। हाई कोर्ट ने पांडे को तीन महीने की कैद, दो हजार रुपए जुर्माना लगाने के साथ-साथ उन पर दो साल तक हाई कोर्ट परिसर में घुसने पर पाबंदी लगा दिया था। पर अब सुप्रीम कोर्ट के जज न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा की बेंच ने जेल की सजा को निलंबित कर दिया लेकिन दो साल तक हाई कोर्ट परिसर में घुसने पर रोक की सजा को बरकरार रखा है।

अगस्त में वकील ने न्यायमूर्ति एपी साही पर आरोप लगाया था। पांडे की बेटी ने हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। इसी मामले में वह पेश हुए थे और उन्होंने हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के अधिकारों को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि ये तमाम आरोप निराधार तरीके से न्यायालय में खुलेआम लगाए गए थे और यह साफ तौर पर आपराधिक अमानना का मामला बनता है। हाई कोर्ट ने कहा कि वकील ने सारी सीमाएं तोड़ दी हैं। हाई कोर्ट ने कहा कि जज के पास अपनी सफाई देने के लिए कोई मंच नहीं होता। वो जहाँ काम करते हैं कई बार गलत पक्षकारों की वजह से उनकी गरिमा को ठेस पहुंचती है। ऐसे कई वकील अपने मुवक्किल के प्रति ज्यादा आशक्त होते हैं और कोर्ट की गरिमा का खयाल नहीं रखते।

न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति रवींद्र नाथ मिश्र ने कहा कि इस मामले में वकील को अवमानना का नोटिस जारी किया गया था लेकिन उन्होंने इसका कोई जवाब नहीं दिया। साथ ही पूरे मामले और आरोपों को देखने से साफ है कि ये मामला अवमानना का बनता है। अदालत ने अवमानना अधिनियम की धारा-2 (सी) के तहत वकील को दोषी माना और सजा सुना दी।


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