Ex-Parte भरण-पोषण आदेश को चुनौती देने से पहले धारा 145(2) BNSS के तहत रिकॉल अर्जी जरूरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट

Praveen Mishra

5 April 2026 1:15 PM IST

  • Ex-Parte भरण-पोषण आदेश को चुनौती देने से पहले धारा 145(2) BNSS के तहत रिकॉल अर्जी जरूरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि धारा 144 BNSS/धारा 125 CrPC के तहत पारित एकतरफा (ex parte) भरण-पोषण आदेश को चुनौती देने के लिए सीधे हाईकोर्ट में आपराधिक पुनरीक्षण (criminal revision) दाखिल नहीं किया जा सकता।

    जस्टिस जय कृष्ण उपाध्याय की पीठ ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में पहले संबंधित फैमिली कोर्ट या न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष धारा 145(2) BNSS/धारा 126(2) CrPC के तहत आवेदन देकर आदेश को निरस्त (recall) कराने का प्रयास करना होगा।

    मामला क्या था?

    मामले में पति ने देवरिया की फैमिली कोर्ट द्वारा पारित एकतरफा आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसे पत्नी को ₹4,000 और दो नाबालिग बच्चों को ₹2,000-₹2,000 प्रति माह भरण-पोषण देने का निर्देश दिया गया था।

    हाईकोर्ट का अवलोकन:

    कोर्ट ने पाया कि फैमिली कोर्ट ने विधि अनुसार नोटिस की सेवा के बाद आदेश पारित किया था और पति के पास वैकल्पिक वैधानिक उपाय उपलब्ध था। ऐसे में बिना उस उपाय का उपयोग किए सीधे हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दाखिल करना स्वीकार्य नहीं है।

    अदालत ने कहा कि कानून के तहत पक्षकार को पर्याप्त कारण दिखाकर एकतरफा आदेश को निरस्त कराने और मामले की मेरिट पर सुनवाई का अवसर पाने का अधिकार है।

    आदेश:

    हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए पति को संबंधित फैमिली कोर्ट के समक्ष जाने का निर्देश दिया। साथ ही, देरी होने की स्थिति में विलंब माफी (condonation of delay) के लिए आवेदन देने की भी अनुमति दी गई।

    Next Story