पत्नी की सरकारी नौकरी की जानकारी RTI में नहीं मिलेगी, जब तक सार्वजनिक हित का ठोस आधार न हो: उत्तराखंड हाईकोर्ट

Praveen Mishra

7 Sept 2026 5:29 PM IST

  • पत्नी की सरकारी नौकरी की जानकारी RTI में नहीं मिलेगी, जब तक सार्वजनिक हित का ठोस आधार न हो: उत्तराखंड हाईकोर्ट

    उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अलग रह रही पत्नी की सरकारी नौकरी से जुड़ी जानकारी RTI के तहत मांगने वाले व्यक्ति को राहत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस material नहीं है, जिससे यह साबित हो कि जानकारी के खुलासे में सार्वजनिक हित इतना महत्वपूर्ण है कि वह पत्नी के निजता के अधिकार पर भारी पड़े।

    चीफ जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस सुभाष उपाध्याय की डिवीजन बेंच ने अपील खारिज करते हुए कहा कि अपीलकर्ता अपनी पत्नी की सरकारी नियुक्ति में कथित हेरफेर के आरोप को प्रथम दृष्टया साबित करने के लिए भी कोई सबूत पेश नहीं कर सका।

    मामला एक सरकारी जूनियर हाई स्कूल में Assistant Teacher के पद पर कार्यरत महिला की सेवा से जुड़ी जानकारी मांगने का था। पति-पत्नी के बीच वैवाहिक विवाद Family Court में लंबित है। पत्नी ने RTI आवेदन का विरोध करते हुए आरोप लगाया था कि जानकारी गलत मंशा से मांगी जा रही है और पहले भी उसके खिलाफ कई शिकायतें कराकर उसे मानसिक रूप से परेशान किया गया।

    Public Information Officer ने जानकारी देने से इनकार किया था। इसके बाद Chief Information Commissioner और हाईकोर्ट के Single Judge ने भी इस निर्णय को बरकरार रखा।

    डिवीजन बेंच के समक्ष अपीलकर्ता ने दावा किया कि Assistant Teachers की नियुक्तियों में कथित फर्जीवाड़े की जांच SIT कर रही है और मामला PIL में लंबित है। उसका आरोप था कि उसकी पत्नी ने भी हेरफेर के जरिए नियुक्ति हासिल की।

    हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि केवल PIL के लंबित होने से यह साबित नहीं होता कि पत्नी की नियुक्ति में भी कोई गड़बड़ी हुई थी। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया आरोप के समर्थन में भी कोई सामग्री रिकॉर्ड पर नहीं है।

    कोर्ट ने माना कि मौजूदा परिस्थितियों में ऐसा कोई सार्वजनिक हित स्थापित नहीं हुआ, जो पत्नी के निजता के अधिकार को पीछे छोड़ सके। इसके साथ ही कोर्ट ने RTI अधिकारियों और Single Judge के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए स्पेशल अपील खारिज कर दी।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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