उत्तराखंड हाईकोर्ट का पुलिस से सवाल: CJP के संसद मार्च में जा रहे नेता को हिरासत में क्यों लिया गया?
Shahadat
20 July 2026 8:00 PM IST

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सोमवार (20 जुलाई) को पुलिस से उन हालात के बारे में सवाल किए, जिनमें उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी (UPP) के अध्यक्ष प्रभात ध्यानी को हिरासत में लिया गया। ध्यानी ने सोशल मीडिया पर घोषणा की थी कि वह कथित NEET पेपर लीक के खिलाफ विरोध कर रहे छात्रों के समर्थन में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संसद मार्च में शामिल होंगे।
कोर्ट ने पुलिस से यह भी स्पष्टीकरण मांगा कि रिहाई के बाद ध्यानी—जो एक वयस्क हैं—को स्वतंत्र रूप से छोड़ने के बजाय उनकी मां को क्यों सौंपा गया।
यह आदेश उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के सचिव लाल मणि द्वारा दायर 'हेबियस कॉर्पस' (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका पर पारित किया गया, जिसमें ध्यानी को कोर्ट के समक्ष पेश करने की मांग की गई। याचिका के अनुसार, ध्यानी ने फेसबुक पर पोस्ट किया था कि वे वांगचुक और CJP के समर्थन में 20 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित मार्च में शामिल होंगे।
याचिका में आरोप लगाया गया कि 19 जुलाई को नई दिल्ली जाने वाली ट्रेन में सवार होने के बाद ऋषिकेश रेलवे स्टेशन पर अज्ञात पुलिसकर्मियों ने ध्यानी को हिरासत में ले लिया।
सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि ध्यानी को पहले रेलवे पुलिस और ऋषिकेश पुलिस ने, और बाद में रामनगर पुलिस ने अवैध रूप से हिरासत में लिया।
जब जस्टिस रवींद्र मैठाणी और जस्टिस सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की तो याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि उन्हें फोन पर जानकारी मिली थी कि पुलिस ध्यानी को रिहा करने और जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने की प्रक्रिया में है।
इसके बावजूद, उन्होंने उस अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाया, जिसके तहत उत्तराखंड पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था। दूसरी ओर, राज्य ने शुरू में हिरासत के हालात बताने वाले दस्तावेज रिकॉर्ड पर रखने के लिए समय मांगा। हालांकि, सुनवाई के दौरान राज्य के वकील ने कोर्ट को सूचित किया कि ध्यानी को रिहा कर दिया गया और उनकी मां, उमा ध्यानी की कस्टडी में सौंप दिया गया।
इस बात का विरोध करते हुए याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि उन्हें ध्यानी की रिहाई की पुष्टि करने वाली कोई जानकारी नहीं मिली है।
इसके बाद बेंच ने निर्देश दिया:
"राज्य के वकील को वे सभी दस्तावेज़ कोर्ट के सामने रखने होंगे, जिनकी वजह से संबंधित व्यक्ति (कॉर्पस) को हिरासत में लिया गया और फिर रिहा किया गया। कोर्ट यह भी जानना चाहेगी कि एक बालिग व्यक्ति को उसकी माँ की कस्टडी में क्यों सौंपा गया और उसे आज़ाद क्यों नहीं किया गया? सबसे पहला और अहम सवाल यह होगा कि किन हालात में और कानून की किन धाराओं के तहत प्रभात ध्यानी को हिरासत में लिया गया?"
याचिका में कहा गया कि ध्यानी को पूरी तरह से गैर-कानूनी और मनमाने ढंग से, बिना किसी कानूनी प्रक्रिया का पालन किए हिरासत में लिया गया।
इसमें कहा गया कि जब याचिकाकर्ता को पता चला कि ध्यानी को कथित तौर पर रामनगर पुलिस स्टेशन में हिरासत में लिया गया तो वह खुद स्टेशन गए और एक लिखित आवेदन दिया। इसमें उन्होंने हिरासत में लिए गए व्यक्ति के ठिकाने, उसे हिरासत में लेने वाले अधिकारी, हिरासत के आधार और उससे बातचीत करने की अनुमति के बारे में जानकारी मांगी।
हालांकि, याचिका के अनुसार, पुलिस अधिकारियों ने न तो आवेदन मिलने की बात मानी और न ही ध्यानी के बारे में कोई जानकारी दी।
याचिका में यह भी कहा गया कि ध्यानी कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं, जिनके लिए नियमित मेडिकल देखभाल की ज़रूरत है। साथ ही उनकी सेहत और भलाई के बारे में बिना किसी जानकारी के उन्हें लगातार हिरासत में रखने से उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गईं।
ध्यानी को पेश करने की मांग के अलावा, याचिका में पुलिस को निर्देश देने की भी मांग की गई कि वह उनकी हिरासत या गिरफ्तारी से जुड़े सभी दस्तावेज़ रिकॉर्ड पर रखें। इनमें उन्हें हिरासत में लेने का कानूनी आधार, हिरासत के कारण, गिरफ्तारी मेमोरेंडम, हिरासत की जगह और उनकी कस्टडी को सही ठहराने वाले अन्य सभी रिकॉर्ड शामिल हैं।
याचिकाकर्ता ने ऋषिकेश रेलवे स्टेशन और सरकारी रेलवे पुलिस परिसर के CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने के निर्देश देने की भी मांग की।
इस मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होनी है।
Case title: Lal Mani v/s State Of Uttarakhand and others


