टिंडर पर बना रिश्ता बिगड़ने का मतलब यह नहीं कि शादी का झूठा वादा करके रेप किया गया: उत्तराखंड हाईकोर्ट
Shahadat
21 July 2026 6:52 PM IST

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि जब दो बालिग लोग टिंडर जैसे डेटिंग ऐप के ज़रिए मिलकर आपसी सहमति से रिश्ता बनाते हैं तो बाद में रिश्ता बिगड़ने और शादी न होने पर उसे शादी के झूठे वादे पर बना रिश्ता नहीं कहा जा सकता। कोर्ट ने पाया कि आरोपों से आपसी सहमति वाला रिश्ता पता चलता है, न कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 के तहत कोई अपराध।
जस्टिस सिद्धार्थ साह, IPC की धारा 376 के तहत दर्ज FIR से शुरू हुई आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की मांग वाली अर्ज़ी (CrPC की धारा 482 के तहत) पर सुनवाई कर रहे थे। FIR के अनुसार, शिकायतकर्ता अगस्त 2019 में टिंडर ऐप के ज़रिए आरोपी के संपर्क में आई। दोनों दोस्त बने, हल्द्वानी में मिले और आरोपी के होटल में शराब पीने के बाद शारीरिक संबंध बनाए।
शिकायतकर्ता का आरोप था कि इसके बाद आरोपी ने उसे बार-बार शादी का भरोसा दिलाया और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाता रहा। उसने तब FIR दर्ज कराई जब उसे इंस्टाग्राम से पता चला कि आरोपी की सगाई किसी और महिला से हो गई। आरोपी का तर्क था कि टिंडर एक डेटिंग प्लेटफ़ॉर्म है, न कि मैट्रिमोनियल वेबसाइट; रिश्ता शुरू से ही आपसी सहमति से बना था और FIR रिश्ता टूटने के बाद ही दर्ज कराई गई।
कोर्ट ने पाया कि FIR और CrPC की धारा 161 और 164 के तहत दर्ज बयानों से यह बात साफ है कि दोनों पक्ष टिंडर ऐप के ज़रिए संपर्क में आए, अपनी मर्ज़ी से मिले और शारीरिक संबंध बनाए। कोर्ट ने यह भी पाया कि महिला एक समझदार व्यक्ति थी और उसने अपनी मर्ज़ी और इच्छा से यह रिश्ता बनाया था।
कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसा रिश्ता बाद में बिगड़ जाता है और शादी नहीं हो पाती है तो सिर्फ़ इसी आधार पर उस शारीरिक संबंध को शादी के झूठे वादे पर बना संबंध नहीं कहा जा सकता।
कोर्ट ने कहा,
“प्रतिवादी नंबर 2 एक समझदार व्यक्ति थीं, जिन्होंने अपनी मर्ज़ी से आवेदक के साथ शारीरिक संबंध बनाए। अगर बाद में रिश्ते में खटास आ जाती है और शादी नहीं हो पाती है तो सिर्फ़ इसी आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि पार्टियों के बीच शारीरिक संबंध शादी के झूठे वादे पर बनाए गए।”
कोर्ट ने आवेदक की इस दलील में दम पाया कि टिंडर ऐप के ज़रिए मिलने के बाद रिश्ते की शुरुआत में शादी का कोई वादा नहीं किया गया। कोर्ट ने माना कि इस मामले में शादी के झूठे बहाने से शारीरिक संबंध बनाने का कोई मामला नहीं बनता है और IPC की धारा 376 के तहत मुक़दमा जारी रखना क़ानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।
इसके अनुसार, कोर्ट ने CrPC की धारा 482 के तहत आवेदन को मंज़ूरी दी और एडिशनल चीफ़ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के पास लंबित IPC की धारा 376 के तहत FIR से जुड़ी पूरी कार्यवाही रद्द की।
Case Title: Ankush Sehgal v. State of Uttarakhand & Anr. [Criminal Misc. Application No. 1248 of 2022]


