अगर कम्यूटेशन के बावजूद पूरी पेंशन मिलती है तो पेंशनभोगी की ज़िम्मेदारी है कि वह अधिकारियों को बताए; रिकवरी सही है: उत्तराखंड हाईकोर्ट
Shahadat
26 July 2026 12:39 AM IST

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि अगर किसी पेंशनभोगी को पेंशन की कम्यूटेड वैल्यू (एकमुश्त राशि) मिलने के बावजूद पूरी पेंशन मिलती रहती है तो यह पेंशनभोगी की ज़िम्मेदारी है कि वह अधिकारियों को सूचित करे, अगर विभाग गलती से तय मासिक कटौती नहीं कर पाता है। कोर्ट ने कहा कि पेंशनभोगी ऐसी प्रशासनिक गलती के कारण गलत तरीके से मिली रकम को अपने पास नहीं रख सकता, खासकर तब जब पेंशन पेमेंट ऑर्डर में ही कटौती का स्पष्ट प्रावधान हो।
चीफ जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस सुभाष उपाध्याय की डिवीजन बेंच एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका सीनियर ट्रेज़री ऑफिसर के उस आदेश को चुनौती देने के लिए दायर की गई, जिसमें मासिक कटौती के ज़रिए पेंशन के कम्यूटेड हिस्से की रिकवरी का निर्देश दिया गया। याचिकाकर्ता ने पेंशन के कम्यूटेशन का विकल्प चुना था और ₹18,99,697 की एकमुश्त राशि प्राप्त की। पेंशन पेमेंट ऑर्डर के तहत मासिक कटौती नवंबर 2017 से शुरू होकर अगस्त 2025 तक जारी रहनी थी। हालाँकि, विभाग की अनजाने में हुई गलती के कारण कोई कटौती नहीं की गई, और याचिकाकर्ता को पूरी पेंशन मिलती रही। बाद में ऑडिट के दौरान गलती का पता चला, जिसके बाद अधिकारियों ने उस राशि की रिकवरी के लिए ₹20,000 प्रति माह की अतिरिक्त कटौती का आदेश दिया, जिसे पहले काटा जाना चाहिए था।
याचिकाकर्ता का तर्क था कि गलती पूरी तरह से विभाग की थी, इसलिए उससे कोई रिकवरी नहीं की जा सकती। यह भी तर्क दिया गया कि एक रिटायर कर्मचारी होने के नाते याचिकाकर्ता अपनी आजीविका के लिए पेंशन पर निर्भर था और मासिक रिकवरी बहुत ज़्यादा थी।
कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता की भी उतनी ही ज़िम्मेदारी थी कि वह उस स्पष्ट गलती की ओर ध्यान दिलाए, जब उसे पेंशन पेमेंट ऑर्डर में कम्यूटेशन के कारण मासिक कटौती का स्पष्ट प्रावधान होने के बावजूद पूरी पेंशन मिलती रही। एकमुश्त कम्यूटेशन राशि स्वीकार करने और उसके बाद विभाग को सूचित किए बिना बिना कटौती वाली पेंशन लेते रहने के कारण याचिकाकर्ता अतिरिक्त राशि को अपने पास रखने का अधिकार नहीं जता सकता।
कोर्ट ने कहा,
"...जब अनजाने में याचिकाकर्ता को मासिक कटौती किए बिना पेंशन की पूरी राशि का भुगतान किया गया, जबकि पेंशन पेमेंट ऑर्डर में ऐसा प्रावधान था, तो यह याचिकाकर्ता का भी कर्तव्य था कि वह विभाग को उस गलती के बारे में बताए।"
बेंच ने रिकवरी की दर को चुनौती देने वाली याचिका को भी खारिज किया। बेंच ने कहा कि ₹20,000 प्रति माह की अतिरिक्त कटौती के बावजूद बकाया राशि वसूलने में अभी भी कई साल लगेंगे और सरकार कोई ब्याज नहीं ले रही है, जबकि याचिकाकर्ता को हर महीने अच्छी-खासी पेंशन मिल रही है।
इसके बाद हाईकोर्ट ने रिट याचिका खारिज की और ट्रेजरी विभाग द्वारा शुरू की गई रिकवरी की कार्यवाही में दखल देने से इनकार किया।
Case Title: Govind Ballabh Pandey v. Directorate of Treasury Pension and Entitlement Uttarakhand Dehradun & Anr. [Writ Petition (S/B) No. 85 of 2026]


