BNSS की धारा 224 | क्षेत्राधिकार न होने पर मजिस्ट्रेट को शिकायत उचित न्यायालय को लौटानी चाहिए : उड़ीसा हाईकोर्ट

Praveen Mishra

6 Aug 2025 3:43 PM IST

  • BNSS की धारा 224 | क्षेत्राधिकार न होने पर मजिस्ट्रेट को शिकायत उचित न्यायालय को लौटानी चाहिए : उड़ीसा हाईकोर्ट

    ओडिशा हाईकोर्ट ने चेक बाउंस से संबंधित एक मामले की सुनवाई करते हुए यह दोहराया कि यदि किसी मजिस्ट्रेट के पास क्षेत्राधिकार नहीं है और वह अपराध का संज्ञान नहीं ले सकता, तो उसे लिखित शिकायत को उपयुक्त टिप्पणी (endorsement) के साथ वापस कर देना चाहिए, ताकि उसे सही क्षेत्राधिकार वाली अदालत में पेश किया जा सके।

    जस्टिस संजय कुमार मिश्रा की एकल पीठ ने 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS)' की धारा 224 का उल्लेख करते हुए कहा, “यदि किसी मजिस्ट्रेट के पास किसी अपराध का संज्ञान लेने की शक्ति नहीं है, और उसे कोई लिखित शिकायत प्राप्त होती है, तो उसे वह शिकायत उचित टिप्पणी सहित उस न्यायालय के लिए वापस करनी होगी जो उस अपराध की सुनवाई कर सकता है।”

    मामले की पृष्ठभूमि:

    इस मामले में आरोपी ने इंडसइंड बैंक, चंडी रोड शाखा, कटक से एक चेक जारी किया था। शिकायतकर्ता (जो याचिकाकर्ता भी हैं) ने यह चेक भुवनेश्वर के लुइस रोड स्थित अपनी बैंक शाखा में जमा किया, लेकिन वह अनादरित (बाउंस) होकर लौट आया।

    नीगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 142(2)(a) के अनुसार, शिकायतकर्ता को भुवनेश्वर की अधिकार क्षेत्र वाली अदालत में केस दायर करना था, लेकिन गलती से उसने यह केस JMFC-II, कटक की अदालत में दायर कर दिया।

    शिकायतकर्ता ने आशंका जताई कि यदि वह केस वापस लेता है और पुनः भुवनेश्वर में दायर करता है, तो समयसीमा (limitation period) के कारण मामला स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसलिए उसने BNSS की धारा 447 के तहत हाईकोर्ट में याचिका दायर कर, मुकदमे को कटक से भुवनेश्वर स्थानांतरित करने की माँग की।

    कोर्ट ने धारा 142(2)(a) की व्याख्या करते हुए कहा कि, "अगर कोई व्यक्ति चेक को अपने बैंक खाते में जमा करता है और वह बाउंस हो जाता है, तो वह उस स्थान की अदालत में केस दायर कर सकता है, जहां उसका बैंक स्थित है।

    और अगर वह चेक सीधे संबंधित बैंक में भुगतान हेतु पेश करता है और वह बाउंस होता है, तो वह उस स्थान की अदालत में केस कर सकता है जहां से चेक जारी हुआ।

    इस प्रकार, यह स्पष्ट था कि शिकायतकर्ता को भुवनेश्वर की अदालत में केस दायर करना चाहिए था, क्योंकि उसका बैंक खाता वहीं स्थित था।

    हालांकि कोर्ट ने याचिकाकर्ता की गलती को स्वीकार किया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले (M/s श्री सेंधुर एग्रो एंड ऑयल इंडस्ट्रीज़ बनाम कोटक महिंद्रा बैंक लिमिटेड, 2025 LiveLaw (SC) 292) का हवाला दिया, जिसमें कहा गया कि केवल क्षेत्राधिकार के आधार पर ट्रायल ट्रांसफर आदेश देना सामान्य बात नहीं होनी चाहिए।

    जस्टिस मिश्रा ने दोहराया कि BNSS की धारा 224 (जो CrPC की धारा 201 के समान है) के तहत जब मजिस्ट्रेट के पास संज्ञान लेने की शक्ति नहीं होती, तो उसे शिकायत पत्र को उपयुक्त टिप्पणी के साथ वापस करना चाहिए, जिससे शिकायतकर्ता उसे उचित अदालत में पुनः दायर कर सके।

    हाईकोर्ट ने कहा, “धारा 224, BNSS के स्पष्ट प्रावधानों को देखते हुए, याचिकाकर्ता (जो कि 1CC केस नंबर 172/2024 में शिकायतकर्ता हैं) को BNSS की धारा 447 के तहत हाईकोर्ट में स्थानांतरण याचिका दायर करने के बजाय, JMFC-II, कटक की अदालत में एक आवेदन देकर शिकायत की वापसी का अनुरोध करना चाहिए था, ताकि वह उसे उचित क्षेत्राधिकार वाली अदालत (भुवनेश्वर) में फिर से दाखिल कर सकें।”

    नतीजतन, कोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह JMFC-II, कटक में एक आवेदन देकर BNSS की धारा 224 का सहारा ले। आवेदन मिलने पर, मजिस्ट्रेट को शिकायत को उपयुक्त टिप्पणी सहित लौटाना होगा, जिससे याचिकाकर्ता उसे भुवनेश्वर की सक्षम अदालत में पुनः दायर कर सकें।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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