HAMA के तहत तय भरण-पोषण बढ़ाने के लिए CrPC की धारा 127 का इस्तेमाल नहीं कर सकती फैमिली कोर्ट: उड़ीसा हाईकोर्ट

  • HAMA के तहत तय भरण-पोषण बढ़ाने के लिए CrPC की धारा 127 का इस्तेमाल नहीं कर सकती फैमिली कोर्ट: उड़ीसा हाईकोर्ट

    उड़ीसा हाईकोर्ट ने कहा कि यदि मूल भरण-पोषण (Maintenance) का आदेश हिंदू दत्तक एवं भरण-पोषण अधिनियम, 1956 (HAMA) के तहत पारित किया गया है, तो उसकी राशि बढ़ाने के लिए फैमिली कोर्ट दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 127 के तहत अधिकार का प्रयोग नहीं कर सकती।

    जस्टिस मृगांक शेखर साहू की एकल पीठ ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें CrPC की धारा 127 के तहत पत्नी और बच्चे के भरण-पोषण की राशि बढ़ाई गई थी।

    अदालत ने कहा कि फैमिली कोर्ट ने गलत वैधानिक प्रावधान के तहत अधिकार का प्रयोग किया।

    मामले में पत्नी ने वर्ष 2007 में HAMA की धारा 18 और 20(2) के तहत अपने और नाबालिग बच्चे के लिए भरण-पोषण की मांग की थी।

    वर्ष 2010 में सिविल जज (सीनियर डिवीजन), भुवनेश्वर ने पत्नी को ₹3,000 और बच्चे को ₹1,500 प्रतिमाह भरण-पोषण देने का आदेश दिया था।

    इसके बाद वर्ष 2016 में पत्नी ने CrPC की धारा 127 के तहत फैमिली कोर्ट में भरण-पोषण बढ़ाने की याचिका दायर की। फैमिली कोर्ट ने 2022 में राशि बढ़ाने का आदेश पारित किया, जिसे पति ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।

    हाईकोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के Rajnesh v. Neha फैसले का उद्देश्य केवल विभिन्न कानूनों के तहत लंबित भरण-पोषण मामलों को एक मंच पर सुनना था, न कि गलत वैधानिक प्रावधान के तहत राहत देने की अनुमति देना।

    अदालत ने फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द करते हुए पत्नी को HAMA की धारा 25 के तहत उचित आवेदन दायर करने की स्वतंत्रता दी।

    साथ ही स्पष्ट किया कि यदि ऐसा आवेदन दायर किया जाता है तो 26 नवंबर 2016 को उसकी आवेदन तिथि (deemed date) माना जाएगा।

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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