हनीमून मर्डर केस: सुप्रीम कोर्ट ने सोनम रघुवंशी की जमानत पर रोक लगाने से किया इनकार, हाईकोर्ट के फैसले पर जताए सवाल

Praveen Mishra

3 July 2026 4:34 PM IST

  • हनीमून मर्डर केस: सुप्रीम कोर्ट ने सोनम रघुवंशी की जमानत पर रोक लगाने से किया इनकार, हाईकोर्ट के फैसले पर जताए सवाल

    सुप्रीम कोर्ट ने राजा रघुवंशी हनीमून मर्डर केस की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने प्रथम दृष्टया मेघालय हाईकोर्ट के उस फैसले पर सवाल उठाए, जिसमें केवल गिरफ्तारी मेमो में धारा 103(1) BNS की जगह गलती से धारा 403(1) BNS लिखे जाने के आधार पर जमानत बरकरार रखी गई थी।

    जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की पीठ ने मेघालय सरकार की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए कहा कि वह जमानत आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करेगी। हालांकि, अदालत ने यह कहते हुए जमानत पर रोक लगाने से इनकार कर दिया कि सोनम पहले ही जेल से रिहा हो चुकी हैं।

    सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जमानत आदेश को "बेहद चौंकाने वाला" बताते हुए कहा कि यह एक पूर्व नियोजित हत्या का मामला है। उन्होंने दलील दी कि गिरफ्तारी मेमो में गलत धारा का उल्लेख केवल टाइपिंग की त्रुटि थी और इससे आरोपी को कोई पूर्वाग्रह नहीं हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि सोनम के फरार होने की आशंका है।

    इस पर जस्टिस सुंदरेश ने कहा कि प्रथम दृष्टया हाईकोर्ट के फैसले पर अदालत को कुछ आपत्तियां हैं। उन्होंने आरोपी के वकील से पूछा कि जब पहले की जमानत याचिकाओं में गिरफ्तारी के आधार न बताए जाने का मुद्दा नहीं उठाया गया, तो बाद में केवल गलत धारा लिखे जाने के तकनीकी आधार पर जमानत कैसे दी जा सकती है, जबकि पहले मेरिट पर जमानत खारिज हो चुकी थी।

    हालांकि, आरोपी की ओर से कहा गया कि उन्हें गिरफ्तारी के आधार कभी बताए ही नहीं गए और अब ट्रायल शुरू हो चुका है, इसलिए उन्हें हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं है।

    सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि आरोपी पहले से रिहा नहीं हुई होती, तो अदालत जमानत आदेश पर रोक लगाने पर विचार करती। फिलहाल अदालत ने मेघालय सरकार की याचिका पर नोटिस जारी कर मामले की सुनवाई जारी रखने का फैसला किया।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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