वकील का आरोप—पुलिस ने भागे हुए जोड़े को हिरासत में लिया; सुप्रीम कोर्ट ने पहले दिल्ली हाईकोर्ट जाने को कहा

Praveen Mishra

20 March 2026 10:03 PM IST

  • वकील का आरोप—पुलिस ने भागे हुए जोड़े को हिरासत में लिया; सुप्रीम कोर्ट ने पहले दिल्ली हाईकोर्ट जाने को कहा

    सुप्रीम कोर्ट ने आज ऑनर किलिंग के डर से सुरक्षा मांग रहे एक भागे हुए जोड़े के मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। पीठ ने पक्षकारों से कहा कि वे पहले अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट का रुख करें।

    खंडपीठ ने उन्हें आज ही हाईकोर्ट जाने के लिए कहा।

    एडवोकेट हरविंदर चौधरी ने चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पांचोली की खंडपीठ के समक्ष इस याचिका का उल्लेख किया।

    उन्होंने बताया कि उन्होंने इस जोड़े को सुप्रीम कोर्ट की पार्किंग में देखा। उन्होंने कहा कि यह जोड़ा कुछ रील्स देखने के बाद इस भ्रम में था कि वे सुप्रीम कोर्ट में शादी कर सकते हैं।

    अधिवक्ता ने बताया कि लड़की बिहार की है और लड़का उत्तर प्रदेश का है, और दोनों को अपने माता-पिता/रिश्तेदारों से जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं।

    उन्होंने जोर देकर कहा कि लड़की को उसके माता-पिता धमकी दे रहे हैं कि वे दोनों को पेड़ से लटका देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जब यह जोड़ा नई दिल्ली के तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचा, तो पुलिस ने मदद करने के बजाय उन्हें हिरासत में लेने की कोशिश की।

    “मैं उन्हें दो वकीलों—अतुल कुमार यादव और त्रिप्ररी चोपड़ा—के साथ लेकर गई। हम तीनों तिलक मार्ग थाने गए… यह हैरान करने वाला है। पुलिस ने हमें रोकने की कोशिश की और उस लड़की और लड़के को भी रोक लिया जो सुरक्षा के लिए आए थे। मैंने पुलिस से कहा कि आप मुझे रोक लीजिए, लेकिन मैं एक युवा लड़की को थाने में नहीं छोड़ूंगी। यही स्थिति थी।”

    इस पर चीफ़ जस्टिस ने पूछा कि यह जोड़ा दिल्ली क्यों आया।

    अधिवक्ता ने बताया कि सोशल मीडिया और रील्स के प्रभाव में आकर इस जोड़े को लगा कि सुप्रीम कोर्ट में शादियां होती हैं और मुख्य न्यायाधीश के घर जाकर सुरक्षा मिलती है।

    “वो रील्स देखते हैं, उन्हें लगा कि सुप्रीम कोर्ट में शादियां हो जाती हैं और मुख्य न्यायाधीश के घर जाया जाता है… सोशल मीडिया के कारण यह एक अजीब धारणा बन गई है।”

    मुख्य न्यायाधीश ने अधिवक्ता से कहा कि वे अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट का रुख करें और हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र के साथ 'सौतेला व्यवहार' न करें।

    अधिवक्ता ने आश्वासन दिया कि वे हाईकोर्ट जाएंगी, साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि ऐसे मामलों में भागे हुए जोड़ों के लिए शेल्टर होम या सुरक्षा सुविधाओं की कमी है।

    इस पर चीफ़ जस्टिस ने कहा कि कई बार ऐसे मामले उतने सरल नहीं होते और कुछ मामलों में भागकर जाने वाला पुरुष पहले से विवाहित भी होता है और उसके बच्चे भी होते हैं।

    खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की सुरक्षा के मुद्दे पर हाईकोर्ट उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय करेगा।

    “हाईकोर्ट जाइए, हमें विश्वास है कि हाईकोर्ट आज ही इस पर विचार करेगा। हम हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल को सूचित करेंगे,” चीफ़ जस्टिस ने कहा।

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