'टाइपिंग की गलती' को झूठा बयान नहीं माना जा सकता, हर गलत बयान पर Perjury नहीं चलेगी : सुप्रीम कोर्ट

Praveen Mishra

22 July 2026 12:55 PM IST

  • टाइपिंग की गलती को झूठा बयान नहीं माना जा सकता, हर गलत बयान पर Perjury नहीं चलेगी : सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि याचिका या अपील में हुई हर गलत या त्रुटिपूर्ण बात (Wrong Statement) को 'झूठा बयान' (False Statement) नहीं माना जा सकता।

    अदालत ने कहा कि Perjury (झूठा बयान देने) की कार्यवाही तभी शुरू की जा सकती है, जब यह साबित हो कि बयान जानबूझकर धोखा देने की मंशा से दिया गया था। केवल टाइपिंग या अनजाने में हुई गलती के आधार पर आपराधिक कार्यवाही नहीं चलाई जा सकती।

    जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की खंडपीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें एक वादी और उसके वकील के खिलाफ कथित टाइपिंग की गलतियों के आधार पर Perjury की कार्यवाही शुरू करने के आदेश को बरकरार रखा गया था।

    मामला एक संपत्ति विवाद से जुड़ा था। अपील और स्टे आवेदन में एक जगह "disposed of" की जगह "dismissed" लिखा गया था, जबकि दूसरे दस्तावेज में "no" शब्द छूट गया था। इन त्रुटियों के आधार पर निचली अदालत ने IPC की धाराओं 193, 199 और 200 के तहत कार्रवाई का आदेश दिया था।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 'Wrong Statement' और 'False Statement' में अंतर है। अनजाने में हुई या टाइपिंग की गलती को झूठा बयान नहीं कहा जा सकता। 'False Statement' वही होगा, जो जानबूझकर अनुचित लाभ लेने या धोखा देने के इरादे से दिया गया हो।

    अदालत ने यह भी कहा कि CrPC की धारा 340 के तहत Perjury की कार्यवाही शुरू करने से पहले अदालत को यह राय बनानी जरूरी है कि ऐसी कार्रवाई "न्यायहित" (expedient in the interest of justice) में आवश्यक है। ऐसा किए बिना जांच का आदेश कानून के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

    इन्हीं कारणों से सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट और निचली अदालत के आदेश रद्द करते हुए अपील स्वीकार कर ली।

    Praveen Mishra

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    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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