अधूरी चार्जशीट और डिफ़ॉल्ट जमानत से जुड़े 'रितु छाबरिया' फैसले पर रोक वाले मामले पर जल्द सुनवाई: चीफ़ जस्टिस

Praveen Mishra

26 Nov 2025 7:30 PM IST

  • अधूरी चार्जशीट और डिफ़ॉल्ट जमानत से जुड़े रितु छाबरिया फैसले पर रोक वाले मामले पर जल्द सुनवाई: चीफ़ जस्टिस

    चीफ़ जस्टिस ने बुधवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट जल्द ही उस महत्वपूर्ण मुद्दे पर फैसला करेगा, जिसमें Ritu Chhabaria Vs. Union of India (2023) के निर्णय को फिलहाल स्थगित (abeyance) रखा गया है। रितु छाबरिया मामले में दो-जजों की पीठ ने कहा था कि अधूरी चार्जशीट दाखिल करने से आरोपी के डिफ़ॉल्ट जमानत (default bail) के अधिकार पर असर नहीं पड़ता।

    बाद में, Directorate of Enforcement बनाम Manpreet Singh Talwar में तीन-जजों की पीठ ने इस फैसले के प्रभाव को निलंबित करते हुए निर्देश दिया था कि कोर्ट रितु छाबरिया सिद्धांत पर आधारित डिफ़ॉल्ट जमानत के आवेदनों पर विचार न करें।

    आज आंध्र प्रदेश लिकर घोटाला मामले में जमानत सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट सी. आर्यमा सुंदरम ने CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की खंडपीठ को याद दिलाया कि यह मुद्दा अभी भी लंबित है। उन्होंने बताया कि रितु छाबरिया फैसले में यह माना गया था कि यदि चार्जशीट अधूरी है और जांच जारी है, तो इसे धारा 167 CrPC (अब BNSS की धारा 187) के तहत वैध चार्जशीट नहीं माना जाएगा और आरोपी डिफ़ॉल्ट जमानत पाने का हकदार होगा।

    उन्होंने यह भी कहा कि CBI बनाम कपिल वाधवान में विपरीत निर्णय दिया गया था, जिसमें कहा गया कि यदि किसी अन्य आरोपी के खिलाफ जांच चल रही है, तो इसका अर्थ यह नहीं कि गिरफ्त में मौजूद आरोपी को डिफ़ॉल्ट जमानत मिल जाएगी। इसके बाद मनप्रीत तलवार मामले में सॉलिसिटर जनरल की दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने रितु छाबरिया निर्णय के उपयोग पर रोक लगा दी थी।

    सुंदरम ने आगे बताया कि इस साल अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने CBI की पुनर्विचार याचिका (review petition) को खारिज कर दिया था, और अब यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि क्या अधूरी चार्जशीट डिफ़ॉल्ट जमानत को रोक सकती है या नहीं। उन्होंने कहा कि मनप्रीत तलवार मामला, जिसे तीन-न्यायाधीशों की पीठ के पास भेजा गया था, अभी भी लंबित है।

    इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा:

    “इस कानूनी मुद्दे पर हम निर्णय करेंगे। हम बहुत जल्द इस मामले को सुनने जा रहे हैं।”

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    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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