संजय कपूर की संपत्ति विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ को मध्यस्थ नियुक्त किया

Praveen Mishra

7 May 2026 5:29 PM IST

  • संजय कपूर की संपत्ति विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ को मध्यस्थ नियुक्त किया

    सुप्रीम कोर्ट के सुझाव के बाद दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की मां रानी कपूर और पत्नी प्रिया कपूर ने रानी कपूर फैमिली एस्टेट विवाद को मध्यस्थता (Mediation) के जरिए सुलझाने पर सहमति जताई है। इस पारिवारिक विवाद में पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ मध्यस्थ की भूमिका निभाएंगे।

    जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने दोनों पक्षों की सहमति के बाद मामले को मध्यस्थता के लिए भेज दिया। कोर्ट ने पक्षकारों से खुले मन से मध्यस्थता प्रक्रिया में भाग लेने और सोशल मीडिया या सार्वजनिक मंचों पर बयानबाजी से बचने को कहा।

    सुनवाई के दौरान जस्टिस पारदीवाला ने कहा, “यह पारिवारिक विवाद है, इसे परिवार तक ही सीमित रहने दें। इसे मनोरंजन का साधन नहीं बनना चाहिए।” यह टिप्पणी उस समय आई जब प्रिया कपूर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने रानी कपूर को राष्ट्रीय टीवी पर “परिवार की अंदरूनी बातें” सार्वजनिक करने से रोकने का अनुरोध किया।

    रानी कपूर ने आरोप लगाया है कि “RK Family Trust/Rani Kapoor Family Trust” फर्जी और अवैध है तथा उनकी जानकारी और सहमति के बिना उनकी संपत्ति और पारिवारिक विरासत को इस ट्रस्ट में ट्रांसफर कर दिया गया। उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में भी मुकदमा दायर कर दावा किया है कि उनके दिवंगत पति और सोना ग्रुप के प्रमोटर डॉ. सुरिंदर कपूर की पूरी संपत्ति की वह एकमात्र उत्तराधिकारी हैं।

    याचिका में आरोप लगाया गया है कि 2017 के आसपास बनाए गए RK Family Trust के जरिए उनकी संपत्ति को अवैध तरीके से स्थानांतरित किया गया। रानी कपूर ने यह भी आरोप लगाया कि संजय कपूर की मृत्यु के तुरंत बाद उनकी बहू प्रिया कपूर ने सोना ग्रुप की कंपनियों पर नियंत्रण हासिल करने के लिए तेजी से कदम उठाए।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि विवाद मध्यस्थता से सुलझ जाता है तो यह सभी पक्षों के हित में होगा, अन्यथा मामला लंबी कानूनी लड़ाई में बदल सकता है। कोर्ट अब पूर्व CJI चंद्रचूड़ की प्रारंभिक रिपोर्ट का इंतजार करेगा।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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