नागरिकता तय करने की प्रक्रिया निष्पक्ष होनी चाहिए, केवल अनुपस्थिति के आधार पर किसी को विदेशी नहीं ठहराया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
Praveen Mishra
14 July 2026 7:03 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी व्यक्ति की नागरिकता या विदेशी होने का निर्धारण निष्पक्ष, कानूनी और उचित प्रक्रिया के तहत ही किया जाना चाहिए। अदालत ने गौहाटी हाईकोर्ट के उन फैसलों को रद्द कर दिया, जिनमें 27 लोगों को विदेशी घोषित करने वाले विदेशी न्यायाधिकरणों के आदेश बरकरार रखे गए थे।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि राज्य का यह वैध हित है कि कोई व्यक्ति अवैध रूप से भारतीय नागरिकता प्राप्त न करे, लेकिन यह उद्देश्य प्रक्रियात्मक निष्पक्षता की कीमत पर हासिल नहीं किया जा सकता।
अदालत ने स्पष्ट किया कि विदेशी अधिनियम, 1946 की धारा 9 के तहत नागरिकता साबित करने का भार संबंधित व्यक्ति पर है, लेकिन इससे ट्रिब्यूनल की निष्पक्ष सुनवाई और साक्ष्यों की जांच करने की जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती। केवल किसी व्यक्ति की अनुपस्थिति के आधार पर उसे विदेशी घोषित नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने सभी 27 मामलों को नए सिरे से सुनवाई के लिए संबंधित विदेशी न्यायाधिकरणों को वापस भेजते हुए निर्देश दिया कि अपीलकर्ता चार सप्ताह के भीतर उपस्थित हों। ट्रिब्यूनल छह महीने के भीतर मामलों का निस्तारण करे। तब तक, यदि अपीलकर्ता कार्यवाही में सहयोग करते हैं, तो उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि उसने अपीलकर्ताओं के भारतीय नागरिक होने के दावे के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी है। मामला केवल इस उद्देश्य से वापस भेजा गया है कि नागरिकता का निर्धारण निष्पक्ष और कानूनसम्मत प्रक्रिया के तहत किया जाए।


