धारा 35(3) BNSS के नोटिस के बाद गिरफ़्तारी केवल नए तथ्यों पर ही संभव: सुप्रीम कोर्ट
Praveen Mishra
6 Feb 2026 2:12 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि BNSS, 2023 की धारा 35(3) के तहत नोटिस जारी करना—उन अपराधों में जिनमें अधिकतम सज़ा सात वर्ष तक है—अनिवार्य है। साथ ही, अदालत ने यह भी कहा कि धारा 35(6) के तहत गिरफ़्तारी नोटिस जारी होने के बाद केवल उन्हीं नए तथ्यों/सामग्रियों के आधार पर की जा सकती है, जो नोटिस जारी करते समय पुलिस अधिकारी के पास उपलब्ध नहीं थीं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि धारा 35(6) के अंतर्गत गिरफ़्तारी करते समय पुलिस अधिकारी उन परिस्थितियों या कारकों पर भरोसा नहीं कर सकता, जो धारा 35(3) का नोटिस जारी करते समय मौजूद थे। यानी, बाद की गिरफ़्तारी के लिए ताज़ा सामग्री/कारक आवश्यक होंगे। कोर्ट ने यह भी चेताया कि धारा 35(6) के तहत गिरफ़्तारी की शक्ति का प्रयोग अत्यंत सीमित और अपवादस्वरूप होना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि Satender Kumar Antil v. CBI (II) (2025) में न्यायालय ने कहा था कि धारा 35(3) के नोटिस का अनुपालन न होना अपने-आप में गिरफ़्तारी को न्यायोचित नहीं ठहराता; गिरफ़्तारी अंतिम उपाय है और आवश्यकता पर विचार कर ही की जानी चाहिए। हालांकि, उस निर्णय में यह प्रश्न खुला रह गया था कि क्या धारा 35(6) के तहत गिरफ़्तारी के लिए नोटिस-चरण से अलग नए आधार आवश्यक हैं।
इसी संदर्भ में, वर्तमान निर्णय—Satender Kumar Antil v. CBI (III)—में सुप्रीम कोर्ट ने यह ठीक-ठीक स्पष्ट कर दिया कि धारा 35(3) के नोटिस के बाद धारा 35(6) के तहत गिरफ़्तारी केवल नए और भिन्न आधारों पर ही हो सकती है।
अदालत ने पुलिस अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि धारा 35(6) सहपठित धारा 35(1)(b) के तहत गिरफ़्तारी कोई नियमित प्रक्रिया नहीं, बल्कि अपवाद है; अतः पुलिस को इस शक्ति का प्रयोग सतर्कता और संयम के साथ करना चाहिए।

