जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने बताया 'समाधान समारोह' का उद्देश्य, बोले- मध्यस्थता को स्थायी व्यवस्था बनाने की जरूरत
Praveen Mishra
20 Aug 2026 2:30 PM IST

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने 'समाधान समारोह' (Samadhan Samaroh) पहल को लंबित मामलों के निपटारे और विवादों के आसान, सहमति-आधारित समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
आकाशवाणी के News On AIR को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य लंबित मामलों की बड़ी संख्या को कम करना और बिना अधिक तकनीकी प्रक्रिया के विवादों का समाधान करना है। 21 अप्रैल से शुरू हुई यह पहल 21 से 23 अगस्त तक होने वाली Special Lok Adalat के साथ समाप्त होगी।
जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि mediation में पक्षकारों को स्वयं अपने विवाद का समाधान तय करने की शक्ति मिलती है। उनके अनुसार, voluntary process के जरिए होने वाला समाधान अदालत के फैसले की तुलना में अधिक स्थायी और संतोषजनक होता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि Samadhan Samaroh कोई अलग कानूनी व्यवस्था नहीं है, बल्कि Legal Services Authorities Act, 1987 के तहत Lok Adalat व्यवस्था से जुड़ा है। वहीं, विवादों का समाधान Mediation Act, 2023 के तहत mediation के जरिए किया जाता है।
उन्होंने बताया कि land acquisition, matrimonial, property, commercial disputes, motor accident claims और cheque-bouncing मामलों सहित विभिन्न विवादों को mediation के लिए लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि mediation को कभी-कभार होने वाली exercise के बजाय permanent institutional setup बनाने की जरूरत है।
जस्टिस नरसिम्हा ने mediators की कमी को एक बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि professionally trained mediators की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि Samadhan Samaroh की सफलता का आकलन केवल settlements की संख्या से नहीं, बल्कि भविष्य के लिए mediation का मजबूत institutional mechanism तैयार करने के आधार पर किया जाना चाहिए।


