20 साल की तय सजा अपील के दौरान आमतौर पर निलंबित की जा सकती है: सिक्किम हाईकोर्ट ने POCSO मामले में दोषी को जमानत दी
Shahadat
7 Nov 2026 9:29 PM IST

सिक्किम हाईकोर्ट ने 'प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस' एक्ट (POCSO Act) के तहत दोषी ठहराए गए 24 वर्षीय व्यक्ति की सजा को निलंबित किया और अपील लंबित रहने तक उसे जमानत दी।
कोर्ट ने कहा कि जहां सजा एक निश्चित अवधि के लिए होती है, वहां अपीलीय अदालत अपने विवेक का इस्तेमाल करते हुए आमतौर पर सजा के अमल को उदारतापूर्वक निलंबित कर सकती है, बशर्ते कोई असाधारण परिस्थिति न हो।
चीफ जस्टिस ए. मुहम्मद मुस्ताक और जस्टिस भास्कर राज प्रधान की खंडपीठ ने कहा:
"हमने देखा है कि स्पेशल जज ने अपीलकर्ता को 20 साल की निश्चित अवधि की सजा सुनाई। यह स्थापित कानून है कि यदि सजा निश्चित अवधि के लिए है तो अपीलीय अदालत आमतौर पर अपने विवेक का इस्तेमाल करते हुए सजा के अमल को उदारतापूर्वक निलंबित कर सकती है, जब तक कि कोई असाधारण परिस्थिति न हो।"
आवेदक देव लिम्बु को POCSO Act की धारा 5(j)(ii) के तहत दोषी ठहराया गया (जिसके लिए धारा 6 के तहत सजा का प्रावधान है)। उसे 20 साल के कठोर कारावास और 50,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। वह मुकदमे के दौरान जमानत पर था, लेकिन दोषी ठहराए जाने के बाद उसे हिरासत में ले लिया गया।
दोषी ठहराए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए उसने सिक्किम हाईकोर्ट में अपील दायर की और BNSS की धारा 430(1) के तहत सजा को निलंबित करने और जमानत की मांग की। उसने तर्क दिया कि वह और पीड़िता एक रिश्ते में थे, उन्होंने 2023 में शादी कर ली थी और उनका एक बच्चा भी है। उसने यह भी बताया कि वह 24 साल का है और उसे अपनी कॉलेज की पढ़ाई जारी रखनी है। राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के कई मौके दिए गए, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया।
हाईकोर्ट ने कहा कि BNSS की धारा 430(1) के तहत अपीलीय अदालत सजा के अमल को निलंबित कर सकती है और अपील लंबित रहने तक जमानत दे सकती है। कोर्ट ने गौर किया कि आवेदक को 20 साल की निश्चित अवधि की सजा सुनाई गई। ऐसी सजाओं को आमतौर पर उदारतापूर्वक निलंबित किया जा सकता है, बशर्ते कोई असाधारण परिस्थिति न हो।
अदालत ने आगे कहा कि राज्य ऐसी कोई असाधारण परिस्थिति नहीं बता पाया, जिसके आधार पर जमानत देने से इनकार किया जा सके। मामले की परिस्थितियों और आवेदक की अपनी पढ़ाई जारी रखने की इच्छा को ध्यान में रखते हुए खंडपीठ ने उसकी सजा पर रोक लगाई और उसे जमानत दी।
जमानत के लिए कुछ शर्तें रखी गईं, जिनमें हर 15 दिन में संबंधित पुलिस थाने में हाजिरी देना और दो जमानतदारों के साथ 10,000 रुपये का जमानत बॉन्ड भरना शामिल है।
Case Title : Dev Limboo v/s State of Sikkim

