OBC प्रमाणपत्र नहीं दे पाई उम्मीदवार, फिर भी जनरल कैटेगरी में मेरिट पर विचार जरूरी: राजस्थान हाईकोर्ट
Praveen Mishra
14 Aug 2026 1:03 PM IST

राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि किसी उम्मीदवार द्वारा आरक्षित वर्ग का प्रमाणपत्र पेश नहीं कर पाने से उसे सामान्य वर्ग (General Category) में अपनी मेरिट के आधार पर चयन के लिए विचार किए जाने से वंचित नहीं किया जा सकता।
जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस आशुतोष कुमार की खंडपीठ ने एक महिला उम्मीदवार को राहत देते हुए राज्य सरकार को उसकी उम्मीदवारी पर सामान्य वर्ग में मेरिट के आधार पर विचार करने का निर्देश दिया।
OBC प्रमाणपत्र नहीं होने पर उम्मीदवारी खारिज
मामला जूनियर इंजीनियर पद पर भर्ती से जुड़ा था। याचिकाकर्ता ने आवेदन फॉर्म में गलती से अपनी श्रेणी OBC दर्ज कर दी थी, लेकिन उसके पास OBC श्रेणी से संबंधित आवश्यक दस्तावेज नहीं थे।
दस्तावेज सत्यापन के दौरान यह सामने आने के बाद उसकी उम्मीदवारी खारिज कर दी गई। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में दलील दी कि उसके अंक General Category की कट-ऑफ से अधिक हैं। इसलिए OBC प्रमाणपत्र नहीं होने के बावजूद उसे सामान्य वर्ग में उसकी मेरिट के आधार पर चयन के लिए माना जाना चाहिए।
'आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा, लेकिन जनरल कैटेगरी में मेरिट से मुकाबला कर सकती है'
राज्य सरकार ने इसका विरोध करते हुए कहा कि उम्मीदवार आवेदन फॉर्म में की गई घोषणा से बंधी होती है और चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद श्रेणी बदलने की अनुमति देने से पूरी मेरिट लिस्ट प्रभावित हो सकती है।
हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के Ramnaresh @ Rinku Khushwah v. State of Madhya Pradesh फैसले का हवाला देते हुए कहा कि आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार यदि अपनी मेरिट के आधार पर सामान्य वर्ग की कट-ऑफ पूरा करता है, तो उसका चयन सामान्य वर्ग में किया जाएगा और उसे आरक्षित कोटे में नहीं गिना जाएगा।
कोर्ट ने स्पष्ट कहा:
“आरक्षित वर्ग का प्रमाणपत्र पेश नहीं करने पर अधिकतम आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा, लेकिन इससे उम्मीदवार का ओपन कैटेगरी में प्रतिस्पर्धा करने का अधिकार खत्म नहीं होता।”
हाईकोर्ट ने कहा कि आवेदन फॉर्म में गलत कैटेगरी दर्ज होना या आरक्षण का दावा साबित न कर पाना उम्मीदवार को उसकी स्वतंत्र मेरिट के आधार पर सामान्य वर्ग में विचार किए जाने से वंचित नहीं कर सकता।
इसके साथ ही कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए राज्य को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता की उम्मीदवारी पर General Category में उसकी मेरिट के आधार पर विचार किया जाए।


