राजस्थान हाईकोर्ट ने क्रिप्टो होल्डिंग्स और डिजिटल वॉलेट की जानकारी देने की शर्त पर साइबर फ्रॉड के आरोपी को ज़मानत दी
Shahadat
25 Jun 2026 9:43 AM IST

साइबर फ्रॉड के मामले में ज़मानत देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने आवेदकों को जांच अधिकारी को पहले बताए बिना कोई नया सिम या फ़ोन लेने/इस्तेमाल करने; नया बैंक खाता खोलने; या कोई सोशल मीडिया अकाउंट, डोमेन नाम या वेबसाइट बनाने से रोक दिया।
जस्टिस रवि चिरानिया की बेंच ने आरोपियों को VPN, TOR ब्राउज़र, प्रॉक्सी सर्वर या किसी भी तरह के गुमनाम नेटवर्क या पहचान छिपाने वाली टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल न करने का भी निर्देश दिया।
इसके अलावा, कोर्ट ने आरोपियों से एक हलफनामा भी मांगा, जिसमें ये जानकारियां शामिल हों:
1. चल और अचल संपत्ति, जैसे ज़मीन, गाड़ियां, बैंक खाते, डिजिटल वॉलेट, क्रिप्टोकरेंसी होल्डिंग्स, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर अपराध करने में किया गया हो।
2. उनके पास मौजूद सभी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, जैसे हार्ड डिस्क और पेन ड्राइव, और उनके IMEI नंबर।
3. आरोपियों द्वारा चलाए या इस्तेमाल किए जाने वाले सभी सोशल मीडिया अकाउंट, ईमेल अकाउंट, डोमेन रजिस्ट्रेशन, वेबसाइट और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म।
बता दें, आवेदकों को BNS और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट के तहत दर्ज FIR में फंसाया गया, जिसमें पहचान बदलकर धोखाधड़ी और जबरन वसूली का आरोप लगाया गया।
उनकी तरफ से दलील दी गई कि उनका इस तरह का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (1930 पोर्टल) पर उनके खिलाफ कोई शिकायत दर्ज नहीं है।
कोर्ट ने आरोपों की प्रकृति और इस बात को ध्यान में रखते हुए कि उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है (जिसमें 1930 पोर्टल पर शिकायत न होना भी शामिल है), आवेदकों को ज़मानत दी।
अन्य शर्तों के अलावा, आवेदकों से कहा गया कि वे ऊपर बताई गई जानकारी देने के लिए 15 दिनों के भीतर एक हलफनामा जमा करें।
इसके अलावा, उन्हें जांच अधिकारी (IO) को पहले बताए बिना कोई नया सिम या फ़ोन लेने/इस्तेमाल करने, नया खाता खोलने, या कोई सोशल मीडिया अकाउंट/डोमेन नाम/वेबसाइट बनाने से रोक दिया गया।
इस तरह, ज़मानत अर्जी का निपटारा कर दिया गया।
Title: Maksood & Ors. v State of Rajasthan

