फर्जी आधार कार्ड बनवाने में मदद का आरोप: राजस्थान हाईकोर्ट ने खारिज की सरकारी अधिकारियों की जमानत याचिका

  • फर्जी आधार कार्ड बनवाने में मदद का आरोप: राजस्थान हाईकोर्ट ने खारिज की सरकारी अधिकारियों की जमानत याचिका

    राजस्थान हाईकोर्ट ने उन आरोपियों की दूसरी जमानत याचिका भी खारिज की, जिन पर UIDAI (आधार कार्ड प्रोजेक्ट) की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाने का आरोप है। इन लोगों ने एक ऐसे व्यक्ति की मदद की थी, जो आधार कार्ड एनरोलमेंट/अपडेशन सेंटर चला रहा था, लेकिन यह सेंटर UIDAI की शर्तों के अनुसार नहीं था।

    जमानत मांगने वाले ये लोग सरकारी अधिकारी हैं, जो प्रोग्रामर और असिस्टेंट प्रोग्रामर के तौर पर काम कर रहे थे। इन पर आरोप है कि ये फर्जी आधार कार्ड बनाने, उनमें हेरफेर करने और जाली दस्तावेज तैयार करने में शामिल थे। इन फर्जी आधार कार्डों का इस्तेमाल देश-विरोधी गतिविधियों में किया जा सकता था।

    जमानत याचिका खारिज करते हुए जस्टिस अशोक कुमार जैन की बेंच ने कहा कि राजस्थान पाकिस्तान से सटा हुआ राज्य है। सीमावर्ती इलाकों में आधार डेटा में बदलाव या अपडेशन से ऐसी गतिविधियां हो सकती हैं, जो राष्ट्रीय हित के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती हैं।

    कोर्ट ने कहा,

    "इस प्रोजेक्ट (आधार) की खासियत यह है कि यह पूरे देश में एक पहचान बन गया। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने (DBT) के लिए किया जाता है। लेकिन, कुछ गलत लोगों ने इस प्रोजेक्ट का दुरुपयोग किया है और वित्तीय या अन्य लाभ पाने के लिए फर्जी पहचान बनाई।"

    इससे पहले, सिंगल बेंच ने इन लोगों की पहली जमानत याचिका भी खारिज की थी। उस आदेश में बताया गया कि इन अधिकारियों ने 'राज-स्वान' (राजस्थान स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क - सरकारी इंटरनेट नेटवर्क) का पासवर्ड उस व्यक्ति को दे दिया था, जो बिना अनुमति के आधार सेंटर चला रहा था। इस तरह उन्होंने UIDAI की विश्वसनीयता को खतरे में डाला और इसके बदले में पैसे लिए।

    इसे देखते हुए कोर्ट ने इन लोगों की जमानत याचिका खारिज कर दी और उनके कार्यों को बेहद गंभीर माना।

    आगे कहा गया,

    "ये याचिकाकर्ता सरकारी कर्मचारी हैं। इनकी भूमिका और इसमें शामिल होने के तरीके को देखते हुए, मेरा मानना ​​है कि इन्हें कोई रियायत नहीं दी जानी चाहिए। इनसे यह उम्मीद की जाती है कि वे न केवल तकनीक के दुरुपयोग को रोकें, बल्कि आधार का इस्तेमाल करके किए जाने वाले किसी भी अपराध के बारे में भी सतर्क रहें।"

    इस प्रकार, जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गईं।

    Case Title : Ramniwas v State of Rajasthan, and other connected petition

    अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

    Next Story