आरोपियों के फरार होने पर बिना जांच बर्खास्त कांस्टेबलों की बहाली का राजस्थान हाईकोर्ट का आदेश

Praveen Mishra

14 Jan 2026 6:00 PM IST

  • आरोपियों के फरार होने पर बिना जांच बर्खास्त कांस्टेबलों की बहाली का राजस्थान हाईकोर्ट का आदेश

    राजस्थान हाईकोर्ट ने तीन कांस्टेबलों की बर्खास्तगी को रद्द करते हुए उनकी बहाली का आदेश दिया, जिन्हें दो आरोपियों के पुलिस हिरासत से फरार हो जाने के बाद बिना नियमित विभागीय जांच के सेवा से हटा दिया गया था। ये आरोपी लूट के गंभीर अपराध के मामले में विचाराधीन थे।

    जस्टिस आनंद शर्मा की पीठ ने कहा कि आरोपियों द्वारा किए गए अपराध की गंभीरता, राज्य सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम, 1958 के नियम 19 के तहत बिना जांच बर्खास्तगी करने का आधार नहीं बन सकती।

    कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून की यह स्थापित स्थिति है कि चाहे आरोपित कर्मचारी पर कितना भी गंभीर आरोप क्यों न हो, उसे नियमित जांच का न्यूनतम अधिकार अवश्य है, ताकि वह अपना पक्ष रख सके।

    मामले की पृष्ठभूमि

    याचिकाकर्ता तीनों कांस्टेबलों को दो आरोपियों को अदालत में पेश करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसी दौरान दोनों आरोपी उनकी हिरासत से फरार हो गए। इसके बाद कांस्टेबलों के खिलाफ प्रारंभिक जांच (Preliminary Enquiry) की गई और केवल उसी के आधार पर नियम 19 के तहत उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया, बिना किसी नियमित विभागीय जांच के।

    राज्य सरकार ने अदालत में दलील दी कि फरार हुए आरोपी गंभीर अपराध (लूट) के आरोपी थे, जिससे पुलिस विभाग की छवि प्रभावित हुई है। सरकार ने यह भी आरोप लगाया कि कांस्टेबलों की लापरवाही या मिलीभगत के कारण आरोपी भागने में सफल हुए।

    हाईकोर्ट का फैसला

    इन दलीलों को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि बर्खास्तगी आदेश में यह कारण दिया गया था कि आरोपी गंभीर अपराध के आरोपी थे, इसलिए नियमित जांच कराना “व्यवहारिक नहीं” है और इसीलिए नियम 19(2) के तहत सीधे बर्खास्तगी उचित है। लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को न तो उचित और न ही न्यायसंगत माना।

    कोर्ट ने कहा—

    “केवल इस आधार पर कि फरार आरोपी गंभीर अपराध के आरोपी थे, विभागीय जांच को दरकिनार नहीं किया जा सकता।”

    अंतिम आदेश

    हाईकोर्ट ने तीनों कांस्टेबलों की बर्खास्तगी रद्द कर दी और राज्य सरकार को उन्हें पुनः सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया। साथ ही सरकार को यह स्वतंत्रता दी गई कि वह नियमित विभागीय जांच कर सकती है।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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