सिर्फ़ आर्थिक तंगी वैवाहिक मामला ट्रांसफर करने का आधार नहीं हो सकती; पति पत्नी के यात्रा का खर्च उठा सकता है: राजस्थान हाईकोर्ट
Shahadat
19 Sept 2026 10:07 AM IST

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक पत्नी की उस याचिका को खारिज किया, जिसमें उसने तलाक की कार्यवाही को अलवर से जयपुर ट्रांसफर करने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ इसलिए कि याचिकाकर्ता ने आर्थिक रूप से कमजोर होने का दावा किया, यह नहीं माना जा सकता कि वह यात्रा करने में असमर्थ या अक्षम है, खासकर तब जब प्रतिवादी-पति ऐसी यात्रा का खर्च उठाने को तैयार हो।
जस्टिस चंद्र प्रकाश श्रीमाली की बेंच ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि याचिकाकर्ता जयपुर की स्थायी निवासी नहीं है और कथित तौर पर वहां किसी अन्य पुरुष के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही है।
बता दें, याचिकाकर्ता का कहना था कि वह जयपुर में रह रही थी और उसकी आय का कोई स्रोत नहीं है। इसलिए सुनवाई की हर तारीख पर अलवर जाना उसके लिए संभव नहीं है, क्योंकि ऐसी यात्रा से उस पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ता।
इसके विपरीत, प्रतिवादी ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता जयपुर की नहीं, बल्कि धौलपुर की स्थायी निवासी है। FIR भी धौलपुर में दर्ज की गई। यह बताया गया कि वह लिव-इन रिलेशनशिप के कारण जयपुर में रह रही है। प्रतिवादी ने इस संबंध में तस्वीरें भी पेश कीं।
आगे यह तर्क दिया गया कि यदि याचिकाकर्ता जयपुर से अलवर की यात्रा करती है तो वह उसकी यात्रा और अन्य खर्च उठाने को तैयार है। साथ ही याचिकाकर्ता की आर्थिक कमजोरी, अपने आप में ऐसी ट्रांसफर याचिकाओं को स्वीकार करने का आधार नहीं हो सकती।
तर्कों को सुनने के बाद कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि याचिकाकर्ता के जयपुर का स्थायी निवासी होने का तथ्य प्रथम दृष्टया स्पष्ट नहीं है।
इसके अलावा, कोर्ट प्रतिवादी द्वारा दिए गए तर्क से सहमत हुआ और माना कि सिर्फ़ इसलिए कि वह आर्थिक रूप से संपन्न नहीं है, यह नहीं माना जा सकता कि वह यात्रा करने में असमर्थ है।
इसलिए यह माना गया कि केवल इसलिए मामले को अलवर से जयपुर ट्रांसफर करने का कोई उचित आधार नहीं है कि याचिकाकर्ता आर्थिक रूप से सक्षम नहीं थी, खासकर तब जब प्रतिवादी ऐसे सभी खर्च उठाने को तैयार है।
तदनुसार, कोर्ट ने ट्रांसफर याचिका खारिज की। साथ ही याचिकाकर्ता को एमिक्स-क्यूरी, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या व्यक्तिगत रूप से पेश होने की अनुमति दी; व्यक्तिगत रूप से पेश होने की स्थिति में वह प्रतिवादी से खर्चों की प्रतिपूर्ति (Reimbursement) की मांग करते हुए आवेदन दायर कर सकती है।
Title: S v T

