पति/पत्नी का अपने पुराने पार्टनर से एक बार मिलना ही अकेले व्यभिचार नहीं माना जाएगा: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
Shahadat
2 Jun 2026 9:01 AM IST

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को सही ठहराया, जिसमें कहा गया था कि पति या पत्नी का अपने पुराने पार्टनर से सिर्फ़ एक बार मिलना अपने आपमें व्यभिचार नहीं माना जा सकता।
साथ ही कोर्ट ने दोहराया कि पति या पत्नी और उनके परिवार वालों पर झूठे और मनगढ़ंत आरोप लगाना मानसिक क्रूरता मानी जाएगी, जिसके आधार पर तलाक़ दिया जा सकता है।
जस्टिस गुरविंदर सिंह गिल और जस्टिस रमेश कुमार ने कहा,
"ट्रायल कोर्ट ने अपने सही विवेक से यह भी पाया कि 11.01.2023 को पत्नी का अकेले ही दूसरे व्यक्ति (रेस्पोंडेंट नंबर 2) से मिलना सिर्फ़ एक घटना थी; इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि वह उस व्यक्ति के साथ व्यभिचार कर रही है। न ही शादी से पहले उस व्यक्ति के साथ उसके पुराने रिश्ते को पति के लिए व्यभिचार का अपराध माना जा सकता है। ट्रायल कोर्ट ने पत्नी की ओर से की गई क्रूरता के आधार पर दोनों पक्षकारों के बीच शादी को सही तौर पर खत्म किया।"
दोनों पक्षकारों की शादी 16 नवंबर, 2021 को हुई थी। इस शादी से कोई बच्चा नहीं हुआ। पति भारतीय नौसेना में कार्यरत है। उसने तलाक़ के लिए फैमिली कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। उसने आरोप लगाया कि पत्नी झगड़ालू स्वभाव की है, शादी से जुड़ी अपनी ज़िम्मेदारियों को नज़रअंदाज़ करती है और अक्सर अपने मोबाइल फ़ोन पर अनजान लोगों से बात करने में व्यस्त रहती है।
उसने आगे आरोप लगाया कि शादी से पहले उसका किसी दूसरे आदमी के साथ रिश्ता था। 11 जनवरी, 2023 को उसे उस आदमी के साथ आपत्तिजनक हालत में पाया गया था।
पत्नी ने सभी आरोपों से इनकार किया और बदले में पति और उसके परिवार वालों पर दहेज मांगने का आरोप लगाया। उसने यह भी आरोप लगाया कि उसके ससुर ने उसके साथ गलत व्यवहार किया था।
फैमिली कोर्ट ने पाया कि पत्नी के आरोप आपस में मेल नहीं खाते और उनके समर्थन में कोई सबूत भी नहीं है। कोर्ट ने कहा कि वह कथित दहेज की मांगों का कोई ब्योरा नहीं दे पाई। साथ ही क्रॉस-एग्ज़ामिनेशन (जिरह) के दौरान उसने खुद यह मान लिया कि दहेज में कोई मोटरसाइकिल नहीं दी गई, जो उसके द्वारा कोर्ट में दिए गए बयानों के बिल्कुल उलट था।
कोर्ट ने उसके ससुर पर लगाए गए आरोपों को भी अविश्वसनीय पाया, खासकर इस बात को ध्यान में रखते हुए कि उसने खुद यह माना था कि उसके ससुर ही उसे कॉलेज छोड़ने जाया करते थे।
यह मानते हुए कि इस तरह के झूठे और मानहानिकारक आरोप क्रूरता की श्रेणी में आते हैं, फैमिली कोर्ट ने तलाक़ का आदेश जारी किया।
हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ़ किया कि किसी दूसरे आदमी से सिर्फ़ एक बार मिलना या शादी से पहले कोई रिश्ता होना, अपने आप में व्यभिचार साबित नहीं करता है। फ़ैमिली कोर्ट के तर्क को सही ठहराते हुए कोर्ट ने फ़ैसला दिया कि इस मामले में किसी भी तरह के दखल की ज़रूरत नहीं है।
बेंच इस बात से सहमत थी कि पत्नी ने पति और उसके परिवार वालों पर बिना सोचे-समझे और बिना किसी सबूत के आरोप लगाए; इन आरोपों में ससुर के चरित्र पर लांछन लगाना और दहेज के लिए परेशान करने के झूठे दावे करना भी शामिल था।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि पत्नी का ऐसा बर्ताव साफ़ तौर पर 'मानसिक क्रूरता' के दायरे में आता है।
उल्लेखनीय है कि कोर्ट ने इस निष्कर्ष को भी सही ठहराया कि किसी पुराने साथी से सिर्फ़ एक बार अकेले में मिलना 'व्यभिचार' (अवैध संबंध) का सबूत नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि निचली अदालत ने तलाक़ का फ़ैसला सही आधार पर दिया था—यानी 'क्रूरता' के आधार पर, न कि 'व्यभिचार' के आधार पर।
कोर्ट ने पत्नी की अपील ख़ारिज करते हुए फ़ैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए तलाक़ का फ़ैसला बरकरार रखा। इसके साथ ही इस मामले से जुड़ी सभी लंबित अर्जियों का भी निपटारा कर दिया गया।
Title: XXXXX v. XXXX

