रिटायर्ड प्रिंसिपल से ₹3 करोड़ की ठगी का आरोप: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने 'डिजिटल अरेस्ट' मामले में आरोपी को दी ज़मानत

Shahadat

11 April 2026 10:22 AM IST

  • रिटायर्ड प्रिंसिपल से ₹3 करोड़ की ठगी का आरोप: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट मामले में आरोपी को दी ज़मानत

    पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने साइबर धोखाधड़ी के कथित मामले में आरोपी को ज़मानत दी। इस मामले में रिटायर्ड प्रिंसिपल से "डिजिटल अरेस्ट" के तरीके से ₹3 करोड़ से ज़्यादा की ठगी की गई। कोर्ट ने टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता की कथित भूमिका, हिरासत की अवधि और इस तथ्य को देखते हुए कि ट्रायल में अभी समय लगेगा, याचिकाकर्ता ज़मानत का हकदार है।

    जस्टिस मनीषा बत्रा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 483 के तहत दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थीं। इस याचिका में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) के विभिन्न प्रावधानों के तहत दर्ज FIR में नियमित ज़मानत की मांग की गई। यह मामला रिटायर्ड प्रिंसिपल द्वारा दायर शिकायत से जुड़ा है। प्रिंसिपल ने आरोप लगाया कि उन्हें एक कॉल आया, जिसमें उन्हें बताया गया कि उनके खिलाफ कई शिकायतें और आपराधिक मामले दर्ज हैं, और उन्हें गिरफ्तार करने की धमकी दी गई।

    उन्हें बताया गया कि उनके नाम पर अवैध गतिविधियों के लिए बैंक खाते खोले गए, और उन्हें अपने परिवार को इस बारे में बताने से मना किया गया। आरोप है कि उन्हें लगातार वर्चुअल निगरानी में रखा गया और डर व दबाव में आकर उन्हें अलग-अलग बैंक खातों में कुल ₹3,03,00,000/- ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया।

    आरोप है कि मौजूदा याचिकाकर्ता इस धोखाधड़ी की कड़ी में बाद के चरण में शामिल हुआ। उसने सह-आरोपियों से ₹4,26,000/- की रकम हासिल की, जिसे उसने क्रिप्टोकरेंसी (USDT) में बदल दिया और कथित तौर पर कमीशन के बदले आगे ट्रांसफर किया।

    याचिकाकर्ता ने दलील दी कि उसे झूठा फंसाया गया, वह 18.02.2025 से हिरासत में है और ये अपराध मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय हैं। उसने कहा कि शिकायतकर्ता को बहकाने में उसकी कोई भूमिका नहीं थी। उसने केवल सह-आरोपियों से मिली सीमित रकम को ही आगे बढ़ाया था। यह भी बताया गया कि सुनवाई के दौरान उसने शिकायतकर्ता को ₹4,26,000/- का डिमांड ड्राफ्ट सौंप दिया। राज्य सरकार ने इन आरोपों की गंभीरता और ऐसे अपराधों के दोबारा होने की आशंका का हवाला देते हुए ज़मानत याचिका का विरोध किया।

    कोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों पर विचार किया और पाया कि याचिकाकर्ता की कथित भूमिका केवल ₹ की रकम प्राप्त करने तक ही सीमित थी। सह-आरोपी से 4,26,000/- रुपये लेकर उसे USDT में बदल दिया। कोर्ट ने आगे कहा कि याचिकाकर्ता 18.02.2025 से हिरासत में है और आगे की जांच के लिए उसकी ज़रूरत नहीं है। मुकदमे को पूरा होने में समय लगेगा।

    कोर्ट ने कहा,

    "याचिकाकर्ता की भूमिका, उसकी हिरासत की अवधि, उसका साफ़-सुथरा पिछला रिकॉर्ड और ऊपर बताए गए तथ्यों को ध्यान में रखते हुए इस कोर्ट की यह राय है कि याचिका मंज़ूर किए जाने लायक है।"

    तदनुसार, हाईकोर्ट ने याचिका मंज़ूर कर ली और याचिकाकर्ता को नियमित ज़मानत पर रिहा करने का निर्देश दिया। इसके लिए उसे निजी और ज़मानत बांड जमा करने होंगे और कुछ शर्तों का पालन करना होगा, जिनमें ये शामिल हैं: वह सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा, बिना अनुमति के देश छोड़कर नहीं जाएगा और सुनवाई की हर तारीख पर ट्रायल कोर्ट के सामने पेश होगा।

    Case Title: Vikram Singh vs. State of Haryana [CRM-M-14736-2026 (O&M)]

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