हाईकोर्ट ने पंजाब चुनाव आयुक्त द्वारा मनोनीत राज्य पदाधिकारियों को बिना चुनाव के नगर निकायों का प्रबंधन करने की अनुमति देने पर आश्चर्य व्यक्त किया

Praveen Mishra

15 Jan 2025 4:20 PM IST

  • हाईकोर्ट ने पंजाब चुनाव आयुक्त द्वारा मनोनीत राज्य पदाधिकारियों को बिना चुनाव के नगर निकायों का प्रबंधन करने की अनुमति देने पर आश्चर्य व्यक्त किया

    पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताते हुए कहा कि पिछले कार्यकाल से पहले चुनाव कराने के संवैधानिक जनादेश के बावजूद पंजाब राज्य चुनाव आयोग ने राज्य को पिछले 4-5 वर्षों से बिना चुनाव के नगर निकायों का प्रबंधन करने की अनुमति दी है।

    चीफ़ जस्टिस शील नागू और जस्टिस सुधीर सिंह ने कहा, "यह न केवल आश्चर्यजनक है, बल्कि चौंकाने वाला है कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 243 यू के तहत एक निर्वाचित निकाय के अंतिम कार्यकाल से पहले चुनाव आयोजित करने के जनादेश के बावजूद, राज्य चुनाव आयोग, पंजाब ने मनोनीत राज्य पदाधिकारियों को पिछले चार से पांच वर्षों से नगर निकायों के मामलों का प्रबंधन करने की अनुमति दी है। खासकर लोकतांत्रिक राजनीति में यह बेहद खेदजनक स्थिति है।

    यह विकास अधिवक्ता भीष्म सिंगर द्वारा दायर एक याचिका में आया है, जिसमें कहा गया है कि जब हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद पंजाब चुनाव आयोग ने दिसंबर 2024 में नगर निगम चुनावों के लिए अधिसूचना जारी की, तो इसमें तलवाड़ा, डेरा बाबा नानक और तरनतारन के क्षेत्र शामिल नहीं थे। इसके बजाय, क्षेत्रों को स्थानीय सरकार विभाग की अधिसूचना में शामिल किया गया था।

    हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसरण में राज्य निर्वाचन आयोग, पंजाब ने यह कहते हुए शपथ-पत्र दायर किया कि उपर्युक्त क्षेत्रों में चुनाव मुख्य रूप से मतदाता सूचियों को अद्यतन न किए जाने के कारण आयोजित नहीं किए जा सके।

    हालांकि, अदालत ने असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि "राज्य निर्वाचन आयोग, पंजाब द्वारा बताए गए उपरोक्त कारण को स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

    उपरोक्त के आलोक में, खंडपीठ ने पंजाब राज्य चुनाव आयुक्त को एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसमें सटीक तारीख बताई गई है कि उक्त तीन नगर निकायों के चुनाव किस तारीख तक आयोजित किए जाएंगे, "जिसमें विफल रहने पर राज्य चुनाव आयुक्त, पंजाब 17.01.2025 को सुबह 10.00 बजे इस अदालत के समक्ष वर्चुअल रूप से पेश होंगे। और डिफ़ॉल्ट की व्याख्या करें।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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