JJ Act के तहत सज़ा कम होने पर पीड़ित अपील नहीं कर सकता; सही रास्ता 'रिविज़न' है: पटना हाईकोर्ट
Shahadat
11 Oct 2026 8:07 PM IST

पटना हाईकोर्ट ने कहा कि कोई पीड़ित या शिकायत करने वाला व्यक्ति सज़ा कम होने के आधार पर उसे बढ़ाने के लिए अपील नहीं कर सकता। इसके बजाय, सही तरीका जुवेनाइल जस्टिस (बच्चों की देखभाल और सुरक्षा) एक्ट, 2015 (JJ Act) की धारा 102 के तहत क्रिमिनल रिविज़न (आपराधिक पुनरीक्षण) याचिका दायर करना है।
जस्टिस जितेंद्र कुमार की सिंगल जज बेंच, छपरा (सारण) में पहले एडिशनल सेशंस जज (Children Court Case No. 05 of 2023) द्वारा 26.03.2026 को पारित आदेश के खिलाफ शिकायतकर्ता द्वारा दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी।
चिल्ड्रन कोर्ट ने दोषी पाए गए दोनों नाबालिगों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 के तहत अपराध के लिए साढ़े तीन साल की सज़ा सुनाई और आदेश दिया कि सज़ा की अवधि में पहले से काटी गई सज़ा का समय घटा दिया जाए।
कोर्ट ने नाबालिगों की प्रगति की सालाना समीक्षा करने और 21 साल की उम्र पूरी होने के बाद उन्हें छपरा जेल भेजने का भी निर्देश दिया। साथ ही समय-समय पर उन्हें चिल्ड्रन कोर्ट के सामने पेश करने की बात भी कही थी।
शिकायतकर्ता ने सज़ा की अवधि को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि दी गई सज़ा कम थी और उसे बढ़ाने की मांग की। रजिस्ट्री ने अपील की स्वीकार्यता (Maintainability) पर आपत्ति जताई। राज्य सरकार ने भी कहा कि अपीलकर्ता को JJ Act, 2015 की धारा 102 के तहत क्रिमिनल रिविज़न याचिका दायर करनी चाहिए।
कोर्ट ने JJ Act की धारा 101 और 102 की जांच की, जिनमें क्रमशः अपील और रिविज़न का प्रावधान है। कोर्ट ने पाया कि धारा 103(2) के अनुसार, JJ Act के तहत अपील या रिविज़न की सुनवाई की प्रक्रिया का पालन, जहां तक संभव हो, CrPC/BNSS के अनुसार किया जाना चाहिए, बशर्ते JJ Act में कोई विशेष प्रक्रिया न बताई गई हो।
कोर्ट ने यह भी गौर किया कि धारा 101(5) में CrPC/BNSS के तहत बताई गई प्रक्रिया के अनुसार चिल्ड्रन कोर्ट के आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील करने का प्रावधान है। इसके बाद कोर्ट ने CrPC की धारा 377 पर विचार किया, जो सज़ा कम होने के ख़िलाफ़ अपील से संबंधित है।
कोर्ट ने कहा:
“मैं यह भी पाता हूँ कि CrPC की धारा 377 के अनुसार, सज़ा कम होने के ख़िलाफ़ अपील केवल राज्य द्वारा ही दायर की जा सकती है और पीड़ित/शिकायतकर्ता को ऐसी अपील दायर करने का कोई अधिकार नहीं है।”
इसके अनुसार, कोर्ट ने माना कि शिकायतकर्ता द्वारा सज़ा बढ़ाने की मांग करते हुए दायर की गई मौजूदा अपील सुनवाई योग्य नहीं है।
CrPC की धारा 372 के तहत पीड़ित के अपील के अधिकार से जुड़े सिद्धांतों के आधार पर कोर्ट ने पाया कि सज़ा कम होना ऐसा आधार नहीं था जिस पर मौजूदा अपील की सुनवाई की जा सके।
इसके अनुसार, अपील सुनवाई योग्य न होने के कारण खारिज किया गया, जबकि अपीलकर्ता को JJ Act की धारा 102 के तहत दो महीने के भीतर आपराधिक पुनरीक्षण (Criminal Revision) दायर करने की छूट दी गई।
कार्यालय को निर्देश दिया गया कि अपीलकर्ता द्वारा विवादित आदेश की एक प्रति जमा करने के बाद उसे उस आदेश की प्रमाणित प्रति वापस कर दी जाए।
Case Title : Ashok Kumar Singh v. State of Bihar and Ors

