गंभीर तथ्यात्मक विवादों का फैसला Article 226 की रिट याचिका में नहीं किया जा सकता: पटना हाईकोर्ट

Praveen Mishra

9 May 2026 5:32 PM IST

  • गंभीर तथ्यात्मक विवादों का फैसला Article 226 की रिट याचिका में नहीं किया जा सकता: पटना हाईकोर्ट

    पटना हाईकोर्ट ने कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट अधिकार क्षेत्र का उपयोग गंभीर तथ्यात्मक विवादों के निपटारे के लिए नहीं किया जा सकता, खासकर जब भूमि पर कब्जे को लेकर पक्षों के बीच विवाद हो और विस्तृत साक्ष्य की आवश्यकता हो।

    जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस शैलेन्द्र सिंह की खंडपीठ कटिहार जिले की एक भूमि विवाद से जुड़ी इंट्रा-कोर्ट अपील पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता का दावा था कि विवादित जमीन उसके पिता की थी और वह उस पर कब्जे में है, जबकि DIET संस्थान उस जमीन में हस्तक्षेप कर रहा है।

    हाईकोर्ट ने कहा कि दोनों पक्ष जमीन पर कब्जे का दावा कर रहे हैं, इसलिए मामले में वास्तविक कब्जे और दस्तावेजों की विस्तृत जांच आवश्यक है, जो रिट कार्यवाही में संभव नहीं है।

    सुप्रीम कोर्ट के फैसले State of U.P. v. Ehsan का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि रिट अदालतें विस्तृत तथ्यात्मक जांच के लिए उपयुक्त मंच नहीं हैं। इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने अपील खारिज कर दी।

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    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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