बिना मंजूरी सरकारी कर्मचारी पर मुकदमा अमान्य: पटना हाईकोर्ट ने वन अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही रद्द की
Amir Ahmad
2 April 2026 4:39 PM IST

पटना हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ बिना पूर्व स्वीकृति के शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही शुरुआत से ही अवैध होती है। अदालत ने वन विभाग के एक रेंज अधिकारी के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द की।
जस्टिस जितेंद्र कुमार की एकल पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी।
मामला एक शिकायत से जुड़ा था, जिसमें आरोप लगाया गया कि अधिकारी ने ट्रैक्टर रोककर मारपीट की 25 हजार रुपये की मांग की और मोबाइल छीन लिया। ट्रायल कोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए समन जारी किया।
याचिकाकर्ता अधिकारी ने दलील दी कि वह वन विभाग में रेंज अधिकारी है और घटना उसके सरकारी कर्तव्यों के दौरान हुई। ऐसे में दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 197 के तहत बिना सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के उसके खिलाफ कार्यवाही नहीं हो सकती।
हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए कहा कि CrPC की धारा 197 का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों को झूठे और दुर्भावनापूर्ण मुकदमों से बचाना है ताकि वे बिना डर के अपने कर्तव्यों का पालन कर सकें।
अदालत ने स्पष्ट किया कि जहां पूर्व स्वीकृति आवश्यक हो और वह नहीं ली गई हो, वहां पूरा मुकदमा ही अधिकार क्षेत्र के बिना चलाया गया माना जाएगा और वह शुरू से ही शून्य होगा।
अदालत ने यह भी पाया कि संबंधित अधिकारी ने शिकायतकर्ता के खिलाफ अवैध खनन के मामले में पहले कार्रवाई की, जिसके तुरंत बाद यह शिकायत दर्ज की गई। इससे शिकायत में दुर्भावना की आशंका भी सामने आती है।
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा लिया गया संज्ञान और समन आदेश दोनों को कानूनन अस्थिर बताते हुए रद्द किया।

