रेप के आरोपी ने पीड़िता के ससुराल वालों को वीडियो भेजे, अपने पक्ष में बयान देने का दबाव बनाया: एमपी हाईकोर्ट ने ज़मानत रद्द की

Shahadat

9 Sept 2026 7:35 PM IST

  • रेप के आरोपी ने पीड़िता के ससुराल वालों को वीडियो भेजे, अपने पक्ष में बयान देने का दबाव बनाया: एमपी हाईकोर्ट ने ज़मानत रद्द की

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने रेप के आरोपी की ज़मानत रद्द की। कोर्ट ने पाया कि आरोपी ने पीड़िता पर अपने पक्ष में बयान देने का दबाव बनाने के लिए उसके ससुराल वालों को वीडियो भेजे थे। [2026 LiveLaw (MP) 358]

    रेप के मामलों में पीड़िता की गरिमा और पहचान की सुरक्षा को सबसे ज़रूरी बताते हुए जस्टिस रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन की बेंच ने कहा:

    "IPC की धारा 376 और 506 के तहत मामले में पीड़िता की पहचान और गरिमा की सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण है। ज़मानत पर रिहा हुए व्यक्ति को कोर्ट द्वारा लगाई गई शर्तों का सख्ती से पालन करना होता है और उसे मिली आज़ादी का गलत इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इस मामले में कोर्ट के सामने पेश किए गए सबूत दिखाते हैं कि रेस्पॉन्डेंट नंबर 1 ने पीड़िता पर अपने पक्ष में बयान देने का दबाव बनाकर ज़मानत की आज़ादी का गलत इस्तेमाल किया है। ऐसे व्यवहार को जारी रखने की इजाज़त नहीं दी जा सकती, खासकर तब जब इससे ट्रायल की निष्पक्षता पर बुरा असर पड़ता हो।"

    पीड़िता ने हाईकोर्ट द्वारा 1 सितंबर, 2025 को दी गई ज़मानत रद्द करने की मांग करते हुए कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। उसका आरोप था कि आरोपी ने ज़मानत की शर्तों का उल्लंघन किया।

    पीड़िता का आरोप है कि आरोपी ने उसके ससुराल वालों को कुछ वीडियो भेजकर उसकी प्राइवेसी का उल्लंघन किया। पीड़िता ने व्हाट्सएप चैट पेश कीं, जिनमें वीडियो, मैसेज और तस्वीरें शामिल थीं। आरोप है कि आरोपी ने एक फेक ID का इस्तेमाल करके ये चीज़ें उसके ससुराल वालों को भेजी थीं। यह भी कहा गया कि वह पीड़िता पर अपने पक्ष में बयान देने का दबाव बना रहा था।

    पीड़िता ने दावा किया कि उसने सतना के पुलिस अधीक्षक (SP) से संपर्क किया, लेकिन कोई असरदार कार्रवाई नहीं हुई। उसके भाई ने सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई।

    आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि उसे मामले में झूठा फंसाया गया और उसने ज़मानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन नहीं किया। आरोपी ने यह भी तर्क दिया कि उसने सतना पुलिस स्टेशन में अपना मोबाइल फोन खोने की शिकायत दर्ज कराई।

    राज्य के वकील ने सीएम हेल्पलाइन का ज़िक्र करते हुए तर्क दिया कि दोनों पक्षों के बीच हुआ विवाद हेल्पलाइन काउंसलर के ज़रिए सुलझा लिया गया। कोर्ट ने कहा कि आरोपी का यह कहना कि उसका मोबाइल फ़ोन खो गया, उसके मामले के पक्ष में नहीं है, क्योंकि आरोपी ऐसा कोई सबूत नहीं दे पाया जिससे यह साबित हो सके कि उसने मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर को सिम कार्ड खोने के बारे में बताया और उन सिम कार्ड का इस्तेमाल बंद करने के लिए कहा था। इसके अलावा, यह तर्क कि आरोपी का फ़ोन किसी और व्यक्ति को मिला और उसने बाद में पीड़िता के ससुराल वालों को वीडियो भेजे, "बहुत ही असंभव और मानने में मुश्किल" लगता है।

    कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों से पता चलता है कि पीड़िता के आरोपों में दम है।

    कोर्ट ने कहा,

    "इन आरोपों को देखते हुए कि ज़मानत पर रिहा होने के बाद आरोपी ने पीड़िता की प्राइवेसी का उल्लंघन किया और उसके ससुराल वालों (सास, ससुर और ननद) को वीडियो भेजे हैं, प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि ज़मानत देते समय इस कोर्ट द्वारा लगाई गई शर्तों का गंभीर उल्लंघन हुआ है"।

    कोर्ट ने कहा कि पीड़िता पर दबाव डालना ज़मानत की शर्तों का उल्लंघन है, और इसलिए ज़मानत रद्द की।

    Case Title: Victim A v DS, MCRC-3689-2026

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