मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सड़क दुर्घटना में 'लापरवाह जांच' के लिए पुलिस को फटकारा, सबूतों की कमी के कारण ड्राइवर को दी ज़मानत
Shahadat
13 May 2026 8:07 PM IST

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक ऐसे व्यक्ति को ज़मानत दी, जिस पर एक गाड़ी चलाने का आरोप था, जिससे एक कंस्ट्रक्शन साइट पर 5 मज़दूरों की जान चली गई और 11 घायल हो गए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि जांच "लापरवाह तरीके से" की गई और पहली नज़र में ऐसा कोई सीधा सबूत नहीं मिला जो उस व्यक्ति को दोषी ठहराता हो।
जस्टिस संजीव एस. कलगांवकर की बेंच ने यह टिप्पणी की:
"यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतनी भयानक घटना में इतनी लापरवाही से जांच की गई। पहली नज़र में केस डायरी में मौजूदा आवेदक के खिलाफ कोई सीधा दोषी ठहराने वाला सबूत नहीं है। ट्रायल पूरा होने में समय लगेगा। आवेदक द्वारा पेश की गई दलीलों में पहली नज़र में दम है और उन्हें पूरी तरह से बेबुनियाद कहकर खारिज नहीं किया जा सकता। अभियोजन पक्ष की सच्चाई और आवेदक की संलिप्तता का फैसला ट्रायल के दौरान सबूतों के आधार पर किया जाएगा।"
केस डायरी के अनुसार, कार के ड्राइवर ने कथित तौर पर सिग्मा कान्हा कॉलोनी, सालिवाडा के पास सड़क निर्माण स्थल पर काम कर रहे मज़दूरों को कुचल दिया, जिसमें 5 मज़दूरों की मौत हो गई और 11 से ज़्यादा घायल हो गए।
कार की नंबर प्लेट का पता लगाने पर पता चला कि वह दीपक सोनी के नाम पर रजिस्टर्ड थी, जिसे गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद उसने बताया कि उसका भाई लखन सोनी (जो इस मामले में आवेदक है) उस दिन गाड़ी चला रहा था। इस तरह, आवेदक को 24 जनवरी, 2026 को गिरफ्तार कर लिया गया।
आवेदक के वरिष्ठ वकील ने दलील दी कि ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिससे आवेदक की संलिप्तता साबित हो सके। वहीं, राज्य सरकार के वकील ने कथित अपराध की गंभीरता को देखते हुए ज़मानत अर्जी का विरोध किया।
कोर्ट ने पाया कि रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों से पता चलता है कि आवेदक को केवल सह-आरोपी दीपक द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर ही इस मामले में फंसाया गया। बेंच ने आगे यह भी पाया कि जांच अधिकारी ने वेदिका नाम की एक महिला का बयान दर्ज करने की ज़हमत भी नहीं उठाई, जो दुर्घटना के समय उसी गाड़ी में सवार थी।
कोर्ट ने कहा,
"किसी भी चश्मदीद गवाह ने यह नहीं कहा है कि कथित घटना के समय गाड़ी आवेदक ही चला रहा था।"
यह देखते हुए कि अधिकारियों ने इतनी दुर्भाग्यपूर्ण और भयानक दुर्घटना की जांच लापरवाही से की थी, अदालत ने फिर भी कहा कि प्रथम दृष्टया सबूतों से आवेदक के खिलाफ कोई सीधा दोषी ठहराने वाला साक्ष्य नहीं मिलता है। अदालत ने आगे यह भी कहा कि आवेदक अभी भी अपने परिवार पर निर्भर है और उसके न्याय से भागने की कोई संभावना नहीं दिखती।
मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना अदालत ने आवेदक को 1,00,000 रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही राशि की एक ज़मानत (श्योरिटी) ट्रायल कोर्ट की संतुष्टि के अनुसार जमा करने की शर्त पर ज़मानत दी।
Case Title: Lakhan Soni v State of Madhya Pradesh, MCRC-8566-2026

