उज्जैन में मुहर्रम जुलूस के दौरान हुए 'मॉक ब्लास्ट' की NIA से जांच की मांग, हाईकोर्ट ने मांगा राज्य सरकार से जवाब
Shahadat
10 July 2026 9:51 AM IST

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को एक हफ़्ते का समय दिया ताकि वह इस बात पर निर्देश ले सकें कि क्या 23 जून, 2026 को मुहर्रम जुलूस के दौरान हुए धमाकों की जांच नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) करेगी।
जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने कहा:
"एडिशनल एडवोकेट जनरल (Addl. A.G.) ने इस मामले में निर्देश लेने के लिए एक हफ़्ते का समय मांगा और उन्हें यह समय दिया गया। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि उज्जैन (म.प्र.) ज़िले के बड़नगर में 23/06/2026 को हुई घटना नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी एक्ट, 2008 के तहत 'शेड्यूल्ड ऑफ़ेंस' (सूचीबद्ध अपराध) से जुड़ी है, इसलिए इसकी जांच NIA द्वारा ही की जानी चाहिए। मामले को अगले हफ़्ते लिस्ट किया जाए।"
याचिका के अनुसार, जुलूस की रात एक 'मॉक टेररिस्ट इंसिडेंट' (नकली आतंकी घटना) हुई थी। दावा किया गया कि एक टाटा मैजिक वैन को हवा में लगभग 40 फ़ीट ऊपर उठाया गया और गाड़ी के अंदर ज़बरदस्त धमाका हुआ, जिससे उसके परखच्चे उड़ गए।
याचिका में आगे कहा गया कि हवा में लटकी गाड़ी पर दो युवक खड़े होकर लाल झंडे लहरा रहे थे और नारे लगा रहे थे। यह भी दावा किया गया कि भीड़ धमाके का जश्न मना रही थी और 'नारा-ए-तकबीर अल्लाहु अकबर' (यानी अल्लाह सबसे महान है) के नारे लगा रही थी।
याचिका में नवंबर 2025 में दिल्ली में हुई ऐसी ही एक घटना का भी ज़िक्र किया गया, जिसमें लाल किले के पास विस्फोटकों से भरी एक कार में धमाका हुआ, जिससे 12 लोगों की मौत हो गई थी और 32 लोग घायल हो गए।
याचिका में यह भी कहा गया कि पुलिस अधिकारियों ने जांच पूरी करने से पहले मीडिया को बताया था कि बंद गाड़ी में पटाखे रखे गए थे और कोई अन्य विस्फोटक पदार्थ नहीं मिला। हालाँकि, पुलिस का बयान धमाके की गंभीरता के अनुरूप नहीं है।
याचिका में कहा गया कि FIR दर्ज करने और 3 लोगों को गिरफ़्तार करने के अलावा पुलिस ने कोई सख़्त कार्रवाई नहीं की। याचिका में कहा गया कि नेशनल सिक्योरिटी एक्ट, 1980 के तहत कोई कार्रवाई नहीं की गई।
याचिका में ज़िला प्रशासन के सुरक्षा इंतज़ामों पर सवाल उठाए गए और बताया गया कि देश की सबसे बड़ी और अहम धार्मिक यात्राओं में से एक, 'महाकाल सवारी', 3 अगस्त, 2026 को होनी है।
इसलिए याचिकाकर्ता इस जनहित याचिका के ज़रिए सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) या नेशनल इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसी (NIA) से इस घटना की जांच की मांग कर रहा है। याचिका में एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट, 1908 के तहत आरोपियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की भी मांग की गई।
Case Title: Sumit Hardiya v State of Madhya Pradesh, WP-25430-2026


