17 साल पुराने सिविल मुकदमे पर MP हाईकोर्ट सख्त, 90 दिनों में निपटाने का निर्देश
Praveen Mishra
25 Aug 2026 3:45 PM IST

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इंदौर जिला अदालत में वर्ष 2009 से लंबित एक सिविल मुकदमे को प्राथमिकता के आधार पर सुनने और जल्द निपटाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि मामला “priority basis” पर सुना जाना जरूरी है।
जस्टिस संदीप एन. भट्ट की पीठ एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मुकदमे को उस अदालत में वापस भेजने की मांग की गई थी, जहां मामले में अंतिम बहस लगभग पूरी हो चुकी थी।
क्या है मामला?
याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि 31वें जिला एवं अतिरिक्त न्यायाधीश के समक्ष मामले में मौखिक और लिखित अंतिम दलीलें पेश की जा चुकी थीं। 7 अप्रैल 2026 और फिर 17 अप्रैल 2026 को विस्तृत बहस भी हुई थी।
इसके बाद मामले को 32वें जिला न्यायाधीश के पास स्थानांतरित कर दिया गया। याचिकाकर्ता के अनुसार, यह तीसरी बार था जब मुकदमे का स्थानांतरण हुआ, जिससे मामले में और देरी हुई।
इस पर हाईकोर्ट ने पहले प्रधान जिला न्यायाधीश से यह बताने को कहा कि जब 31वें जिला न्यायाधीश मामले में अंतिम दलीलें सुन चुके थे, तो मुकदमा 32वें जिला न्यायाधीश के पास क्यों स्थानांतरित किया गया।
बाद की सुनवाई में कोर्ट को बताया गया कि 31वें जिला न्यायाधीश अब 22वें कोर्ट का कार्यभार संभाल रहे हैं और उनके सभी लंबित मामले नए कोर्ट यानी 32वें जिला न्यायाधीश के पास स्थानांतरित किए गए हैं।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने कहा कि सामान्यतः ऐसे मामलों को उसी न्यायिक अधिकारी के समक्ष भेजना उचित होता है, जिसने मामले को विस्तार से सुना हो। हालांकि, परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने मामले को 31वें और 32वें जिला न्यायाधीश के अलावा किसी अन्य सक्षम अदालत में भेजने का निर्देश दिया।
सभी पक्षों के वकीलों ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि वे सुनवाई में सहयोग करेंगे और अनावश्यक स्थगन नहीं मांगेंगे।
इसके बाद हाईकोर्ट ने संबंधित न्यायाधीश को निर्देश दिया कि मामले की अंतिम बहस को प्राथमिकता के आधार पर, जरूरत पड़ने पर लगातार या कम अंतराल पर सुनते हुए, आदेश की प्रति प्राप्त होने की तारीख से 90 दिनों के भीतर मुकदमे का निपटारा करने का प्रयास किया जाए।
कोर्ट ने मामले को जल्द निपटाने पर जोर देते हुए कहा कि इसे अब प्राथमिकता के आधार पर देखा जाना चाहिए।


