लंबे समय तक पति-पत्नी के तौर पर साथ रहने से कानूनी अनुमान उनकी शादी के वैध होने के पक्ष में होगा, न कि अवैध होने के: एमपी हाईकोर्ट
Shahadat
9 Sept 2026 10:00 AM IST

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कहा कि जब कोई पुरुष और महिला लंबे समय तक पति-पत्नी के तौर पर साथ रहते हैं, तो कानूनी अनुमान उनकी शादी के वैध होने के पक्ष में होगा, न कि अवैध होने के। [2026 LiveLaw (MP) 353]
जस्टिस प्रणय वर्मा की बेंच ने कहा:
"गाँव में प्रतिवादी नंबर 2 के अलावा कोई भी ऐसा नहीं है, जो प्रतिवादी नंबर 1 और 3 को पति-पत्नी न मानता हो। अनुमान हमेशा शादी के वैध होने के पक्ष में होगा, न कि अवैध होने के। पिछले मुक़दमे में, प्रतिवादी नंबर 2 ने प्रतिवादी नंबर 3 को प्रतिवादी नंबर 1 की अवैध पत्नी कहा था। प्रतिवादी नंबर 2 ने ऐसा कोई सबूत पेश नहीं किया जिससे यह साबित हो सके कि रजिया प्रतिवादी नंबर 1 की पत्नी नहीं थी। इस तरह वादियों ने संतोषजनक ढंग से साबित किया कि प्रतिवादी नंबर 3, प्रतिवादी नंबर 1 की कानूनी रूप से ब्याही हुई पत्नी थी।"
यह विवाद वादियों के इस दावे से शुरू हुआ कि वे धुन्ना और उनकी पत्नी रजियाबाई के बेटे हैं। धुन्ना की शादी पहले निमिया से हुई, जिनकी मौत हो चुकी थी। वादियों के अनुसार, धुन्ना ने रजियाबाई से 'कारी' (Kari) प्रथा के तहत शादी की थी और वे दोनों इसी रिश्ते से पैदा हुए।
वादियों ने धुन्ना की संपत्ति में हिस्सा मांगा, लेकिन प्रतिवादियों ने धुन्ना के साथ वादियों की माँ के वैवाहिक रिश्ते पर सवाल उठाया। उनका तर्क था कि वादियों की माँ धुन्ना की कानूनी रूप से ब्याही हुई पत्नी नहीं है और वादी नाजायज़ बच्चे हैं।
ट्रायल कोर्ट ने वादियों का दावा आंशिक रूप से स्वीकार किया, लेकिन पहली अपील अदालत ने आदेश में बदलाव करते हुए कहा कि ज़मीन और घर में वादियों का 2/5 हिस्सा है और वे सांकेतिक कब्ज़े के हकदार हैं। इसके बाद प्रतिवादी ने दूसरी अपील में हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया।
हाईकोर्ट के सामने अपीलकर्ता ने तर्क दिया कि वादी यह साबित करने में नाकाम रहे हैं कि धुन्ना और रजियाबाई ने 'कारी' प्रथा के तहत शादी की। इसलिए सिर्फ़ साथ रहने (Cohabitation) के आधार पर वैध शादी का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। हालांकि, कोर्ट ने पाया कि सबूतों से यह साबित होता है कि धुन्ना और रजियाबाई काफी समय तक पति-पत्नी की तरह साथ रहे थे। कोर्ट ने गौर किया कि वे 26 साल तक साथ रहे थे।
चौदम्मा बनाम वेंकटप्पा मामले का ज़िक्र करते हुए बेंच ने फिर से कहा कि जब कोई जोड़ा लंबे समय तक पति-पत्नी की तरह साथ रहता है तो उनके शादीशुदा होने की मज़बूत धारणा बनती है।
बेंच ने आगे कहा कि धुन्ना और रजियाबाई के पति-पत्नी की तरह रहने का निष्कर्ष सही है और इस चरण पर इसमें कोई बदलाव नहीं किया जा सकता। इसलिए बेंच ने अपीलीय अदालत के आदेश को बरकरार रखा और अपील खारिज की।
Case Title: Fulla v Munna, SA-1018-1999


