परिवार छोड़ने वाले माता-पिता की आय EWS आरक्षण में नहीं गिनी जाएगी: केरल हाईकोर्ट

Praveen Mishra

13 Sept 2025 7:44 PM IST

  • परिवार छोड़ने वाले माता-पिता की आय EWS आरक्षण में नहीं गिनी जाएगी: केरल हाईकोर्ट

    केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में एक अहम फैसला दिया है कि अगर किसी बच्चे के माता-पिता में से कोई एक परिवार को छोड़कर चला गया है, तो ऐसे माता-पिता की आय को EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) प्रमाणपत्र जारी करने में नहीं जोड़ा जाएगा।

    जस्टिस एन. नागेश एक याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। याचिकाकर्ता (पहली याचिकाकर्ता) नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) की अभ्यर्थी थी, जिसकी EWS प्रमाणपत्र के लिए दी गई अर्जी को खारिज कर दिया गया था।

    कोर्ट ने कहा,“EWS प्रमाणपत्र देने में पिता और मां दोनों की आय को ध्यान में रखना होता है। लेकिन अगर माता-पिता में से कोई परिवार को छोड़कर चला गया है, तो उसकी आय को नहीं जोड़ा जाएगा। ग्राम पंचायत अध्यक्ष का प्रमाणपत्र बताता है कि दूसरी याचिकाकर्ता (मां) को पति ने 12 साल पहले छोड़ दिया था और उसने दोबारा विवाह भी नहीं किया। पिता विदेश में दूसरी फैमिली के साथ रह रहा है। ऐसे हालात में पिता की आय को शामिल किए बिना ही बेटी को EWS का लाभ मिलना चाहिए।”

    याचिकाकर्ता ने EWS श्रेणी में NIFT प्रवेश परीक्षा में 54वीं रैंक हासिल की थी, लेकिन आवेदन यह कहकर खारिज कर दिया गया कि मां के पास 6.95 सेंट जमीन है, जबकि EWS की सीमा 4.13 सेंट है। परंतु सरकारी सर्वे रिपोर्ट के अनुसार मकान वाली जमीन केवल 3.5 सेंट थी और बाकी कृषि भूमि थी।

    राजस्व अधिकारियों ने प्रमाणित किया कि परिवार की वार्षिक आय ₹60,000 से कम है और पंचायत अध्यक्ष ने भी प्रमाणपत्र दिया कि पिता ने परिवार छोड़ दिया है। इस आधार पर कोर्ट ने कहा कि EWS प्रमाणपत्र देने से इंकार करने का कोई कारण नहीं है।

    इसके अलावा, आवेदन खारिज करने का दूसरा कारण यह बताया गया था कि स्कूल प्रमाणपत्र में मां के नाम की जगह सौतेली मां का नाम दर्ज है। इस पर कोर्ट ने कहा कि गांव अधिकारी का प्रमाणपत्र स्पष्ट करता है कि वास्तविक मां दूसरी याचिकाकर्ता ही है, इसलिए इस विसंगति के आधार पर EWS प्रमाणपत्र से इनकार नहीं किया जा सकता।

    हाईकोर्ट ने अंततः तहसीलदार को आदेश दिया कि EWS प्रमाणपत्र जारी किया जाए और NIFT निदेशक को निर्देश दिया कि यदि सीट खाली है और अन्य मानदंड पूरे होते हैं, तो याचिकाकर्ता को प्रवेश दिया जाए।

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    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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