पत्नी की मामूली सैलरी स्टेटस के अंतर को नहीं भर पाती, बेरोज़गार पति की 'कमाई की अच्छी-खासी क्षमता': हाईकोर्ट ने गुज़ारा भत्ता बरकरार रखा
Shahadat
24 April 2026 10:29 AM IST

कर्नाटक हाईकोर्ट ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर की दायर रिट याचिका खारिज की, जिसमें उसने अपनी अलग रह रही पत्नी के लिए हर महीने ₹20,000 के अंतरिम गुज़ारा भत्ते के आदेश को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि एक स्वस्थ शरीर वाला, अच्छी तरह से पढ़ा-लिखा पति बेरोज़गारी का बहाना बनाकर गुज़ारा भत्ता देने की अपनी कानूनी ज़िम्मेदारी से बच नहीं सकता।
जस्टिस डॉ. के. मनमधा राव की सिंगल जज बेंच ने 17 अप्रैल के अपने आदेश में कहा कि सिर्फ़ इस बात से कि अलग रह रही पत्नी हर महीने ₹40,000 की सैलरी कमा रही है, उसे गुज़ारा भत्ता देने से पूरी तरह मना नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि असली पैमाना यह होगा कि क्या उसकी इनकम इतनी काफ़ी है कि वह उसी तरह की जीवनशैली बनाए रख सके जैसी वह अपने ससुराल में जीती है।
कोर्ट ने आगे कहा,
"...कोर्ट को यह आकलन करना होगा कि क्या इनकम इतनी काफ़ी है कि वह ससुराल में मिली जीवनशैली के बराबर की जीवनशैली बनाए रख सके। शादी के दौरान याचिकाकर्ता की दस्तावेज़ों में दर्ज मासिक इनकम को देखते हुए प्रतिवादी (पत्नी) की ₹40,000 की सैलरी तुलनात्मक रूप से बहुत कम है और यह स्टेटस के अंतर को नहीं भर पाती।"
'राजनेश बनाम नेहा (2021) 2 SCC 324' मामले का हवाला देते हुए, सिंगल जज बेंच ने तर्क दिया कि 'एक स्वस्थ शरीर वाले पति के बारे में यह माना जाता है कि वह कमाने में सक्षम है' और 'वह बेरोज़गारी का बहाना बनाकर गुज़ारा भत्ता देने से बच नहीं सकता।'
कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया,
"...याचिकाकर्ता के TDS रिकॉर्ड दिखाते हैं कि उसकी कमाई की क्षमता काफ़ी अच्छी है। उसकी पेशेवर योग्यताएं और पिछली अच्छी-खासी इनकम यह संकेत देती हैं कि वह शादी से जुड़ी ज़िम्मेदारियों को पूरा करने में लगातार सक्षम है।"
बता दें, याचिकाकर्ता और उसकी अलग रह रही पत्नी ने 2021 में धारवाड़ के एक मंदिर में शादी की थी। अगस्त 2025 में एक फैमिली कोर्ट ने अलग रह रही पत्नी को ₹20,000 का अंतरिम गुज़ारा भत्ता देने का आदेश दिया था, जिसे पति ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

