चेक बाउंस मामलों में जुर्माना न भरने पर डिफॉल्ट सजा 6 महीने से अधिक नहीं हो सकती: कर्नाटक हाईकोर्ट
Praveen Mishra
15 Jun 2026 11:16 PM IST

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि चेक बाउंस मामलों में जुर्माना अदा न करने पर दी जाने वाली डिफॉल्ट कारावास की अवधि अपराध के लिए निर्धारित अधिकतम सजा के एक-चौथाई से अधिक नहीं हो सकती। चूंकि परक्राम्य लिखत अधिनियम (NI Act) की धारा 138 के तहत अधिकतम सजा दो वर्ष है, इसलिए डिफॉल्ट सजा छह महीने से अधिक नहीं हो सकती।
जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने कहा कि जुर्माना न भरने पर दी जाने वाली कारावास अतिरिक्त दंड नहीं, बल्कि अदालत के आदेश के पालन को सुनिश्चित करने का एक उपाय है। अदालत ने यह भी कहा कि एक ही लेन-देन से जुड़े कई चेक बाउंस मामलों में लगातार डिफॉल्ट सजाएं देकर किसी व्यक्ति को अत्यधिक अवधि तक जेल में नहीं रखा जा सकता।
मामले में याचिकाकर्ता ने 10 करोड़ रुपये का ऋण लिया था और तीन चेक बाउंस मामलों में जुर्माना न भरने के कारण जेल में था। अदालत ने पाया कि वह छह महीने से अधिक समय जेल में बिता चुका है। इसे अनुचित और अनुच्छेद 21 के विपरीत मानते हुए अदालत ने उसकी रिहाई का आदेश दिया। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता कानून के अनुसार वसूली की कार्यवाही जारी रख सकता है।

