एक ही अपराध के लिए जब POCSO और IPC दोनों के तहत आरोप लगें तो POCSO Act के तहत सिर्फ़ ज़्यादा सज़ा दी जानी चाहिए: झारखंड हाईकोर्ट

  • एक ही अपराध के लिए जब POCSO और IPC दोनों के तहत आरोप लगें तो POCSO Act के तहत सिर्फ़ ज़्यादा सज़ा दी जानी चाहिए: झारखंड हाईकोर्ट

    झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि जब किसी आरोपी को एक ही अपराध के लिए POCSO Act की धारा 4 और IPC की धारा 376(2)(f) दोनों के तहत दोषी ठहराया जाता है तो POCSO Act की धारा 42 के अनुसार कोर्ट को ज़्यादा सज़ा देनी चाहिए; यह दोनों अपराधों के लिए अलग-अलग सज़ाओं को एक के बाद एक (Consecutively) चलाने की इजाज़त नहीं देता है।

    जस्टिस आनंद सेन और जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की डिवीज़न बेंच सिमडेगा के एडिशनल सेशंस जज-कम-स्पेशल जज (POCSO) द्वारा स्पेशल (POCSO) केस नंबर 01/2014 में 02.07.2015 को दोषी ठहराने के फ़ैसले और 07.07.2015 को सज़ा के आदेश के ख़िलाफ़ अपील पर सुनवाई कर रही थी।

    अपीलकर्ता को IPC की धारा 376(2)(f), 323 और 506 और POCSO Act की धारा 4 के तहत दोषी ठहराया गया। उसे IPC की धारा 376(2)(f) के तहत 10 साल की कठोर सज़ा और POCSO Act की धारा 4 के तहत भी 10 साल की कठोर सज़ा सुनाई गई। दोनों सज़ाओं को एक के बाद एक चलाने का आदेश दिया गया। उसे IPC की धारा 323 और 506 के तहत अपराधों के लिए भी सज़ा सुनाई गई।

    हाईकोर्ट के सामने अपीलकर्ता ने अपनी दोषसिद्धि (Conviction) को चुनौती नहीं दी और अपनी दलीलें सिर्फ़ सज़ा तक ही सीमित रखीं। यह तर्क दिया गया कि POCSO Act की धारा 42 में वैकल्पिक सज़ा का प्रावधान है, जब आरोपी को ऐसे अपराध का दोषी पाया जाता है, जिसके लिए POCSO Act और किसी अन्य कानून दोनों के तहत सज़ा हो सकती है। राज्य ने निष्पक्ष रूप से माना कि POCSO Act की धारा 4 और IPC की धारा 376(2)(f) के तहत सज़ाओं को एक के बाद एक चलाने का आदेश नहीं दिया जा सकता।

    कोर्ट ने POCSO Act की धारा 42 का ज़िक्र करते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट को दोनों प्रावधानों के तहत बताई गई सज़ाओं में से ज़्यादा सज़ा देनी चाहिए। उस समय POCSO Act की धारा 4 में कम-से-कम सात साल से लेकर उम्रकैद तक की सज़ा का प्रावधान था, जबकि IPC की धारा 376(2)(f) में कम से कम दस साल की कठोर सज़ा का प्रावधान है, जिसे बढ़ाकर उम्रकैद भी किया जा सकता था।

    इसलिए कोर्ट ने कहा:

    “इसलिए POCSO Act की धारा 42 के प्रावधानों के अनुसार, IPC की धारा 376(2)(f) के तहत ज़्यादा सज़ा का प्रावधान है, जो ट्रायल कोर्ट द्वारा दी जानी चाहिए। POCSO Act की धारा 4 और IPC की धारा 376(2)(f) दोनों अपराधों के लिए सज़ा देने और उन्हें एक के बाद एक (Consecutive) चलाने का निर्देश देने का कोई सवाल ही नहीं उठता।”

    इसके अनुसार, बेंच ने IPC की धाराओं 376(2)(f), 323 और 506 और POCSO Act की धारा 4 के तहत अपीलकर्ता की दोषसिद्धि (Conviction) को तो बरकरार रखा, लेकिन POCSO Act की धारा 4 के तहत सुनाई गई सज़ा रद्द की।

    कोर्ट ने देखा कि अपीलकर्ता अपील लंबित रहने के दौरान पहले ही 13 साल की सज़ा काट चुका था और अभी भी हिरासत में था। चूंकि उसने उसे सुनाई गई अधिकतम सज़ा काट ली थी, इसलिए कोर्ट ने निर्देश दिया कि अगर किसी अन्य मामले में उसकी ज़रूरत न हो, तो उसे तुरंत रिहा कर दिया जाए।

    Case Title : Ajay Kerketta v. State of Jharkhand

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