झारखंड हाईकोर्ट ने पूर्व कांग्रेस मंत्री योगेंद्र साव को किया बरी, 2010 के NTPC प्रदर्शन मामले में मिली राहत

Praveen Mishra

29 Aug 2026 12:19 PM IST

  • झारखंड हाईकोर्ट ने पूर्व कांग्रेस मंत्री योगेंद्र साव को किया बरी, 2010 के NTPC प्रदर्शन मामले में मिली राहत

    झारखंड हाईकोर्ट ने पूर्व कांग्रेस मंत्री और विधायक योगेंद्र साव को 2010 में NTPC परियोजना कार्यालय के उद्घाटन के दौरान हुए प्रदर्शन से जुड़े आपराधिक मामले में बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस और विशिष्ट साक्ष्य नहीं है, जिससे यह साबित हो कि योगेंद्र साव ने किसी व्यक्ति के साथ मारपीट की या भीड़ को हिंसा के लिए उकसाया।

    जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की एकल पीठ ने ट्रायल कोर्ट और अपीलीय अदालत के फैसलों को रद्द करते हुए योगेंद्र साव को IPC की धारा 323, 341, 504 और 353, सहपठित धारा 149 के तहत आरोपों से बरी कर दिया।

    2010 के प्रदर्शन से जुड़ा था मामला

    मामला 17 अगस्त 2010 का है, जब हजारीबाग में NTPC के एक परियोजना कार्यालय का उद्घाटन किया जा रहा था। अभियोजन के अनुसार, उद्घाटन के दौरान योगेंद्र साव समेत कई लोग मौके पर पहुंचे और NTPC के सहायक महाप्रबंधक के साथ कथित तौर पर गाली-गलौज और मारपीट की।

    FIR में विशेष रूप से एक अन्य आरोपी लीलाधर साव पर शिकायतकर्ता के साथ मुक्के से मारपीट करने का आरोप लगाया गया था।

    जांच के बाद योगेंद्र साव समेत 15 आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में आरोपपत्र दाखिल किया गया। हजारीबाग की निचली अदालत ने योगेंद्र साव को दोषी ठहराते हुए अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई थी। अप्रैल 2016 में जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने भी उनकी दोषसिद्धि बरकरार रखी थी।

    किसी गवाह ने योगेंद्र साव पर नहीं लगाया विशिष्ट आरोप

    हाईकोर्ट में बचाव पक्ष ने निचली अदालतों के निष्कर्षों को चुनौती दी। रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों की समीक्षा के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि अधिकांश गवाहों ने योगेंद्र साव की पहचान जरूर की, लेकिन किसी भी गवाह ने उनके खिलाफ कोई विशिष्ट या प्रत्यक्ष कृत्य नहीं बताया।

    कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों से इतना सामने आता है कि NTPC कार्यालय के निर्माण को लेकर लोगों में नाराजगी थी और उद्घाटन के दौरान भीड़ प्रदर्शन करने के लिए जुटी थी। लेकिन योगेंद्र साव द्वारा किसी व्यक्ति पर हमला करने या भीड़ को उकसाने का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला।

    कोर्ट ने यह भी महत्वपूर्ण माना कि FIR में जिस लीलाधर साव पर सीधे मारपीट का आरोप था, उसे भी इसी साक्ष्य के आधार पर बरी कर दिया गया था।

    हाईकोर्ट ने कहा कि निचली अदालतों ने साक्ष्यों का सही तरीके से मूल्यांकन नहीं किया और योगेंद्र साव को दोषी ठहराने का निष्कर्ष रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों के विपरीत था।

    हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि रद्द की

    हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट और अपीलीय अदालत के फैसलों को रद्द करते हुए योगेंद्र साव को सभी आरोपों से बरी कर दिया।

    चूंकि वह पहले से जमानत पर थे, कोर्ट ने उन्हें जमानत बांड की जिम्मेदारियों से भी मुक्त कर दिया।

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    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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