रोड एक्सीडेंट क्रॉस-FIR में वकील के खिलाफ कोई ज़बरदस्ती कार्रवाई न की जाए: झारखंड हाईकोर्ट का आदेश

Shahadat

19 Feb 2026 9:20 PM IST

  • रोड एक्सीडेंट क्रॉस-FIR में वकील के खिलाफ कोई ज़बरदस्ती कार्रवाई न की जाए: झारखंड हाईकोर्ट का आदेश

    झारखंड हाईकोर्ट ने रांची में रोड एक्सीडेंट की घटना से जुड़ी क्रॉस-FIR में आरोपी वकील मनोज टंडन को अंतरिम सुरक्षा दी है और मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई। साथ ही कोर्ट ने कहा है कि एक ही घटना से जुड़े दोनों क्रॉस-केस की जांच एक ही जांच अधिकारी से करानी चाहिए।

    जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की सिंगल जज बेंच वकील द्वारा दायर मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें वकील ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) के अलग-अलग नियमों के तहत दर्ज डोरंडा P.S. केस नंबर 51 और 52/2026 के संबंध में पुलिस द्वारा परेशान करने का आरोप लगाया। याचिकाकर्ता ने पक्षपात और गलत जांच की आशंकाओं का हवाला देते हुए जांच को CBI या NIA जैसी किसी स्वतंत्र एजेंसी को ट्रांसफर करने की भी मांग की थी।

    याचिकाकर्ता ने बताया कि यह घटना 17 फरवरी, 2026 को एक छोटे से रोड एक्सीडेंट की वजह से हुई, जब वह हाई कोर्ट जा रहे थे, तब उनकी कार एक मोटरसाइकिल से थोड़ी सी टच हो गई। इसके बाद उन्हें कथित तौर पर डोरंडा पुलिस स्टेशन में कई घंटों तक हिरासत में रखा गया और बिना सीज़र मेमो तैयार किए उनकी कार सीज़ कर ली गई। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि क्रॉस-केस अलग-अलग इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर को सौंपे गए और उन्हें किसी भी समय अरेस्ट होने का डर था।

    इन दलीलों पर ध्यान देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि एक ही घटना से पैदा हुए क्रॉस-केस की जांच एक ही इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर को करनी चाहिए। आगे कहा कि जब जांच की फेयरनेस पर असर डालने वाले ऐसे मामले कोर्ट के सामने लाए जाते हैं तो कोर्ट को दखल देना चाहिए। यह देखते हुए कि ऐसे मामलों में मौके का फ़ायदा उठाना हाईकोर्ट की ज़िम्मेदारी है।

    कोर्ट ने कहा:

    “ऊपर दी गई बातों को देखते हुए हमारे भारत के संविधान के फ़ेडरल ढांचे को बर्बाद नहीं होने दिया जा सकता और यह हाईकोर्ट की ज़िम्मेदारी है कि एक बार जब इस तरह का मामला कोर्ट की जानकारी में आता है तो हाईकोर्ट को मौके का फ़ायदा उठाना चाहिए।”

    फ़ॉर्म का निचला भाग

    इस तरह हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के ख़िलाफ़ रजिस्टर्ड क्रॉस-केस में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाने का निर्देश दिया और ज़बरदस्ती की कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा दी। कोर्ट ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता के ख़िलाफ़ कोई ज़बरदस्ती वाला कदम नहीं उठाया जाएगा और डोरंडा पी.एस. केस नंबर 51 और 52/2026 के संबंध में, जो ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फ़र्स्ट क्लास-XIII, रांची की अदालत में पेंडिंग है, जांच समेत आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई।

    मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च 2026 को होगी।

    Title: Manoj Tandon v. State of Jharkhand Through Director General of Police

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